नमस्कार दोस्तों मैं नागपुर से राकेश हूँ. मैं 31 वर्षीय नया नया शादीशुदा व्यक्ति हूँ मैं देसी कहानियों का नियमित पाठक हूँ और मैं हर प्रकार की कहानियों को पढ़ता हूँ,आज मैं अपने साथ घटित हुई सच्ची दास्तान बयान करने जा रहा हूँ,
सेक्स मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है और इसकी आदत भी मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगा दी थी. जी हां.. मेरी बहन की सहेलियों ने मुझे सेक्स का मजा दिलाया था,आपको इस बात को पढ़ कर कुछ अंदाजा तो हो ही गया होगा कि मेरी कहानी किस तरफ जाने वाली है,
यह घटना मेरे साथ तब हुई थी, जब मेरी बड़ी बहन की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था,उस वक़्त मैं १७ साल का था,तब मैं दुबला पतला ही था और ज़्यादा किसी से बातचीत नहीं करता था,अपने क्लास में सबसे छोटा और भोला था. मुझे कुछ चीजें जल्दी से समझ नहीं आती थीं,
पर जब से बड़ा हुआ, तो मेरा लंड हमेशा फुदकता रहता था स्कूल की छोटी क्लास तक मेरी दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो जाता था. लेकिन मैंने कभी गलत तरीके से तब सोचा नहीं था,इसलिए मुझे घर और कॉलोनी में सभी लोग काफी भोला समझते थे और मैं था भी,
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अब मैं बारहवीं में आ गया था, मेरी बड़ी बहन भी बड़ी क्लास में थी. लेकिन बारहवीं तक पहुंचते पहुंचते मुझे सेक्स के बारे काफी जानकारी और रूचि हो गई थी,मैंने कई बार अपने लंड की मुठ भी मारी थी, लेकिन अब तक मुझे कभी किसी चूत के असली में दर्शन नहीं हो सके थे,
बस पोर्न वगैरह में ही चुदाई चूत मम्मे देख लेता था,मेरी कॉलोनी में ही मेरी बड़ी बहन की एक क्लासमेट रहा करती थी, जिसका नाम प्रीति था. प्रीति और दीदी एक साथ ही कॉलेज आना जाना करते थे और कभी कभी पढ़ाई करने मेरे घर भी आते थे. इसलिए मैं उनसे घुल-मिल कर ही बात करता था,
प्रीति की उम्र कुछ 20 की रही होगी, लेकिन उसका बदन बहुत बड़ा और शानदार था. उसके दूध भी काफी बड़े और तने हुए थे, मैं सोचना था कि उसकी मदमस्त चूचियों और उठी हुई गांड को देखकर कोई भी अपना लंड हिला लेगा,कुछ ऐसा कामुक बदन प्रीति का था,
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प्रीति से अच्छी पहचान के वजह से कई बार मैं उसके घर भी जाया करता था और वो भी मुझे छोटा भाई कहकर अपने घर बुलाती थी,शुरूआत में प्रीति को हमेशा ही बहन मानता था,लेकिन बाद में जब से मुझे सेक्स की हवस चढ़ना शुरू हुई, तो मैं हमेशा प्रीति के मादक बदन को देख कर मुठ मारने लगा था,
जब भी प्रीति मुझे उसके घर बुलाती थी, तब उसको देखने के बाद सीधे उसके ही बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पे रगड़ कर मुठ मार लिया करता था,हुआ यूं कि उस दिन प्रीति घर में अकेली थी और काफी बोर हो रही थी, मैं भी स्कूल से आते हुए उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ लगा कर घर बुला लिया,
मैं उधर गया, तो प्रीति ने कहा- आज मैं घर में अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ.मैंने पूछा- क्यों अंकल आंटी किधर गए हैं?उसने मुझे बताया- मेरे मम्मी पापा एक शादी में बाहर गए हुए हैं, इसलिए तू हाथ पैर धोकर और खाना खाकर मेरे घर आजा, हम दोनों ताश खेलेंगे,मुझे उसके साथ ताश खेलने में बड़ा मजा आता था,
क्योंकि जब वो झुक कर पत्ते बांटती थी तो मुझे चूचियों के दीदार हो जाते थे,मैं से जल्दी घर गया और खाना खाकर, अपनी मम्मी को बताकर प्रीति के घर चला गया,प्रीति शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी. मैंने देखा कि उसने अपनी ड्रेस बदल ली थी और अब वो एक छोटा फ्रॉक पहन कर मेरे सामने थी,
उसकी इस छोटी फ्रॉक से उसके घुटने से नीचे तक हिस्सा पूरा दिख रहा था,मैंने छिपी हुई नजरों से देखा कि उसके पैर में हल्के हल्के से बाल थे और पूरा पैर एकदम गोरा दिख रहा था,उसके पैरों को देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा था, पर मैं अभी कुछ कर भी नहीं सकता था,
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हम दोनों पलंग पर ही ताश खेलने बैठ गए,उस दिन मैं हाफ पैंट पहन कर प्रीति के घर आया था, प्रीति ने वैसे भी फ्रॉक पहन रखा था, सो बैठते ही उसका फ्रॉक थोड़ा ऊपर उसके जांघों तक पहुंच गया,उसकी नर्म नर्म गोरी गोरी जांघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे,बैठते ही उसने फ्रॉक नीचे करके अपनी जांघों को छुपा लिया,
उसके ऐसे करने से मेरा मन ताश से उठकर सेक्स पे जाने लगा.
अब तक मैंने कभी भी चुत नहीं देखी थी, तो मेरा मन बहुत व्याकुल हो रहा था,तभी खेलते खेलते अचानक प्रीति का फ्रॉक अपने आप उठ गया या पता नहीं उसने जानबूझ कर उठा दिया था,ये सिर्फ उसे ही पता था,
खैर हम लोग ताश खेलने में मन लगाने लगे, ताश खेलते खेलते हम लोग एक दूसरे से हंसी मजाक भी कर रहे थे,तभी उसने कहा- यार बैठे बैठे तो मैं अकड़ सी गयी हूँ,यह कह कर उसने तकिए का सहारा लिया और एक साइड पर बैठी सी हो गई,उसने इसी के साथ अपने एक पैर को पूरा मोड़ा और अपने दूसरे पैर को मोड़ कर उसके ऊपर रख दी,
उसके ऐसा करने से उसकी फ्रॉक तो ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे सीधी दिखने लगी,उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल होने लगी,मेरे पैंट के ऊपर ही मेरा तंबू बन गया,अब मेरी हालत पतली होने लगी,मेरा मन ताश खेलने के बजाए उसकी पैंटी पर टिक गया,
उसकी गुलाबी रंग की पैंटी पहनी हुई थी. शायद उसने चुत के बाल साफ़ नहीं किये थे, इसलिए पैंटी पर ऊपर से ही कुछ काला काला सा दिखाई दे रहा था,प्रीति ने ज़्यादा हलचल तो नहीं की लेकिन वो खुद से अपनी पैंटी बार बार मुझे दिखा रही थी,अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था,
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मैंने बाथरूम का बहाना करके उसके वाशरूम में गया और तेजी से प्रीति का नाम लेकर मुठ मारने लगा. थोड़ी देर में मैंने लंड से पूरा वीर्य बाहर निकाल लिया,अब थोड़ी मुझे संतुष्टि मिल गई, सिर्फ उसके पैंटी और गोरी टांगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गयी थी,
जब मैं वापस रूम में गया, तो वो पलंग पे लेटी हुई थी और पूछ रही थी- इतनी देर बाथरूम में क्या कर रहे थे?मैंने बात को टाल दिया और थोड़ी देर में घर वापस आ गया,दो दिन बाद प्रीति मेरे घर आई और बोलने लगी कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने के लिए आ जा.
थोड़ी देर में जब मैं उसके घर पंहुचा, तो मैंने उसके घर की बेल बजायी. उसने दरवाजा खोला,मैं उसे देख कर एकदम से हैरान रह गया.. शायद आज उसने ब्रा नहीं पहनी थी,एक टाइट वाली फ्रॉक पहन कर वो बाहर आई थी और उसके हल्के हल्के निप्पल के उभार उसकी इस टाईट फ्रॉक के ऊपर से दिख रहे थे,
हम लोग फिर ताश खेलने में बिजी हो गए,आज मैंने भी अंडरवियर नहीं पहना था और ऐसे ही हाफ पैंट और शर्ट पहन कर उसके घर गया था,कुछ देर ताश खेलने के बाद वो फिर से पलंग के एक बाजू में तकिया लेकर बैठ गयी और बोली कि मेरी तो आज कमर और ज्यादा दर्द कर रही है,
उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर से उसकी पैंटी के दर्शन होने लगे. मेरा पूरा मन उसकी पैंटी खोलकर उसकी चुत देखने का हो रहा था,आज उसने नीले रंग की पैंटी पहनी हुई थी,अब मेरा बिल्कुल भी मन ताश खेलने का नहीं कर रहा था,मेरा पूरा ध्यान उसकी नीली पैंटी पर था,
थोड़ी देर बाद वो बोली कि अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं कर रहा, कुछ और खेल खेलते हैं,मैंने भी हामी भर दी,फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी बहुत दर्द हो रहा है,मैंने भी उसको बोल दिया- लाओ मैं अच्छे से तेल लगा कर मालिश कर देता हूं,
इसमें मेरा स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसको नंगी जो देखना था.
मेरी बात पर वो झट से राजी हो गई और तेल लेने किचन में चली गयी,तभी इतने में डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन घर आ गई. मेरा चुत देखने का ख्वाब आज भी पूरा नहीं हो पाया,मैं मन मसोस कर रह गया,
लेकिन एक बात समझ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है,दो दिन ऐसे ही गुजर गए. आखिर रविवार को मेरी बड़ी बहन ने प्रीति के नोट्स वापस करने के लिए मुझे उसके घर भेजा.
जैसे ही मैंने उसके घर की घंटी बजायी, तो उसकी मां ने दरवाजा खोला. वो बोलीं- हां अन्दर आ जा, प्रीति अन्दर है,
वो तेरे आने की ही कह रही थी. मैं भी प्रीति की मौसी के घर जा रही हूँ. प्रीति की शादी पक्की होने वाली है, मुझे उसी की बात करने जाना है. बेटा मुझे आने में कुछ देर हो जाएगी, तुझे समय हो, तो तू मेरे घर पर रुक जाना,मैंने उनसे कुछ नहीं कहा, बस हल्के से मुस्कुरा कर अन्दर आ गया,
इस वक्त प्रीति के पापा भी ड्यूटी पे गए हुए थे. मतलब कि आज वो फिर से अकेली ही थी,मुझे देखते ही प्रीति एकदम से खुश हो गयी. उसने ताश की गड्डी को निकाला और हम लोग ताश खेलने लगे. मैंने उससे उसकी शादी की बात को लेकर कुछ नहीं कहा. बस आज मैंने ठान लिया था कि प्रीति की चुदाई करना ही है,
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कुछ देर ताश खेलने के बाद उसने फिर से वैसे ही पैर पलंग के साइड में लगा दिए और आज मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी. मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मचलने लगा,मैं अभी उसकी चुत देखने का तरीका सोच ही रहा था कि उसने पैर उठाते हुए मुझे अपनी पैंटी दिखाई और कहा- यार, मेरी कमर का दर्द जा ही नहीं रहा है,
आज तो और भी ज्यादा दर्द है तू थोड़ा सा दबा दे,मैंने झट से उसे लेटने के लिए कहा और उसकी कमर पर हाथ फेर कर दबाने लगा,फिर उसने पीठ भी दबाने के लिए बोला. मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ को दबाना चालू रखा,हालांकि उसके बदन को आज पहली बार छूते हुए ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था,
इतने में वो पलट गई और मुझे अपने पैर और ऊपर तक दबाने के लिए बोलने लगी. मैंने धीरे धीरे उसके पैर दबाते हुए उसकी जांघों तक पहुंच गया था,मेरा लंड पूरा खड़ा हो चुका था और पैंट फाड़ने को तैयार था,इतने में अचानक से वो उठ गई और उसने मुझे अपनी तरफ खींच लिया,
मैं कुछ समझ पाता कि वो मुझे सब तरफ से चूमने लगी. शायद वो सेक्स के लिए कुछ ज़्यादा ही मचल रही थी,मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा,हम दोनों कुछ बोल नहीं रहे थे, बस एक दूसरे से लिपट चिपट कर रगड़ सुख ले रहे थे,फिर उसने अपना हाथ धीरे से मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया. आगे की कहानी अगले भाग में..
Note ये कहानी सत्या घटना हैं केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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