मस्त आंटी की चुदाई indiasex stories






नमस्कार दोस्तो,मैं उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ,मेरी उम्र 23 वर्ष है, लंबाई 5 फीट 7 और मेरे हथियार की लंबाई 6.5 इंच है तथा इसकी मोटाई 3.5 इंच है,मेरा लंड जब किसी चुत में जाता है तो वह अपनी पावर से उस चुत को इस बात के लिए मजबूर कर देता है कि वह बार बार मेरे लौड़े से ही चुदे,







आज मैं आप सबके सामने एक सच्ची घटना जिसमें मैंने एक मैंने आंटी को चोदा,को सेक्स कहानी के रूप में पेश करने जा रहा हूँ.यह पर मेरी पहली सेक्स कहानी है,अगर मुझसे कोई गलती हो जाए तो कृपया मुझे माफ कर दीजिएगा.







यह मैंने आंटी को चोदा वाली कहानी उन दिनों की है जब मैं बारहवीं पास करके घर पर था,मेरे घर के बिल्कुल पास में मामा का मकान है,मामा को अपने व्यवसाय के चलते कुछ निर्माण का काम बाहर मिल गया था,इसलिए उनका पूरा परिवार गुवाहाटी चला गया था.







वे अपने घर को किराए पर चढ़ा कर चले गए थे,उनके मकान में एक किराएदार आंटी रहने आ गई थीं,वे बड़े अच्छे स्वभाव की महिला थीं तो जल्द ही हमारे परिवार के साथ उनके बहुत अच्छे संबंध बन गए थे,मैं उन्हें आंटी कह कर ही बुलाता था,वे भी हमारे घर आती-जाती रहती थीं,







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उनके पति किसी प्राइवेट सेक्टर में बाहर नौकरी करते थे और बच्चे पापा के पास घूमने गए हुए थे,वे इधर अकेली ही रहने आई थीं,आंटी के बारे में थोड़ा बता देता हूँ,उनकी उम्र लगभग 35-36 साल थी, फिगर 34-32-34 और लंबाई 5 फीट 4 इंच की थी.







उनका गदराया हुआ बदन था और वे काफी सेक्सी थीं,उन्हें पहली नजर में ही देखकर कोई भी उनका दीवाना हो सकता था,अभी आंटी को यहां रहते हुए पंद्रह दिन ही हुए थे कि तभी एक त्यौहार आ गया,आंटी अकेली रहती थीं इसलिए उस त्यौहार वाले दिन मैंने सोचा कि आज उनसे कुछ खाने-पीने का पूछ लेता हूँ,







मैं आंटी के गया तो पता चला कि उन्होंने खाना खा लिया था,उनसे बात होने लगी तो वे बोलीं- अकेले रहने में खाने पीने की तो कोई दिक्कत नहीं होती,पर मुझे रात में अकेले सोने में बड़ा डर लगता है,साजन तुझे यदि दिक्कत न हो तो तू आज से मेरे पास ही लेट जाया करना,







उस वक्त मेरे दिमाग में उनके लिए कोई गलत ख्याल नहीं था.
मैं उन्हें हां कह कर घर आ गया,घर पर आकर मैंने बताया कि आंटी को अकेले घर में सोने में डर लगता है, तो वे उनके घर में रात को सोने के लिए कह रही हैं,उस पर मेरी मम्मी बोलीं- हां यह बात वह मुझसे भी कह रही थी,







तुझे यदि कोई दिक्कत न हो, तो तुम उसके पास सो जाया करना.
मैंने मन ही मन हामी भर दी,हालांकि मुझे उनको लेकर कामुक भाव तो आते थे लेकिन अब तक मैंने यह नहीं सोचा था कि उनके साथ सेक्स जैसा कुछ हो सकता है,घर आकर मैंने रात का खाना खाया और उनके यहां लेटने चला गया,







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जब मैं कमरे के बाहर पहुंचा तो खिड़की खुली हुई थी,मैंने झांककर देखा कि आंटी अपने पति से फोन पर बात कर रही थीं और बात करते-करते अपनी चूत में उंगली डालकर मस्त हो रही थीं,वे उस वक्त साड़ी पहनी हुई थीं और अपनी साड़ी व पेटीकोट को कमर तक ऊपर चढ़ा कर चुत में उंगली का मजा ले रही थीं,







मैंने ध्यान से देखा तो आंटी अपनी पैंटी के बाजू से अपनी चुत के अन्दर डाल कर उसे रगड़ रही थीं,उनकी उंगली आगे पीछे हो रही थी तो साफ समझ में आ रहा था कि वे चुत में फिंगरिंग कर रही हैं,उनकी यह स्थिति देख कर मुझे वासना चढ़ने लगी और मैं आंटी को चुत रगड़ते हुए देखने लगा,







कुछ देर बाद मुझे लगा कि मुझे ज्यादा देर तक उन्हें इस तरह से नहीं देखना चाहिए,पता नहीं आंटी मेरे बारे में क्या सोचेंगी,तो मैंने गेट खटखटाया और आवाज देते हुए कहा- आंटी, क्या मैं अन्दर आ सकता हूँ,आंटी ने अपनी स्थिति सही की और अन्दर आने का बोल दिया,







उनके पति ने फोन पर पूछा- कौन आया है?आंटी ने उन्हें बताया- मुझे अकेले डर लग रहा था ना, इसलिए साजन को बुला लिया है. मैं चारपाई पर लेटूँगी और साजन को बेड पर लेटा दूँगी,यही सब बात करने के बाद आंटी ने अंकल को बाय बोल कर फोन कट कर दिया,







मैं अन्दर चला गया और देखा कि वे अपनी उंगली मुँह में डाले हुए उसे चूस रही थीं,मैंने उन्हें उंगली चूसते हुए देखा तो समझ गया कि वे अपनी चुत के रस को चाट रही हैं,फिर भी मैंने पूछा- आप अपनी उंगली क्यों चूस रही हैं आंटी?वे हंस कर बोलीं- खट्टी जैली खा रही थी न इसलिए उसी का स्वाद ले रही हूँ,







मैंने कहा- अरे वाहमुझे भी चखाइए न,वे बोलीं- अरे अभी अभी खत्म हुई है. बाद में फिर कभी चखवा दूँगी!मैंने भी आंखें नचाते हुए कहा- मुझे आपकी खट्टी जैली को चखने का इंतजार रहेगा.
इस बात पर वे हंसने लगीं,इस तरह से हम दोनों ने एक दूसरे से बिना कुछ कहे अपनी अपनी कामना जता दी थी,







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इसके बाद आंटी ने अपनी चारपाई के बिल्कुल बगल में मेरी चारपाई भी लगा दी,मुझे थोड़ा शक हुआ. मैंने सोचा कि कहीं आंटी के मन में भी वही आग तो नहीं जल रही, जो अब मेरे अन्दर भड़कने लगी है?थोड़ी देर हम इधर-उधर की बातें करते रहे, फिर आंटी सो गईं,







मुझे लगा कि शायद मेरी गलतफहमी है,तो मैं लेट गया,मैं तो वैसे भी देर से सोता हूँ, नींद नहीं आ रही थी. मोबाइल में गेम खेल रहा था,तभी अचानक से मेरी नजर आंटी पर चली गई,वे गर्मी के दिन थे, तो आंटी एक ढीली सी नाइटी में लेटी थीं,







आंटी की उस नाइटी में से उनके उभरे हुए स्तनों को देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया,अब मेरे दिमाग में बस एक ही कीड़ा काट रहा था कि किसी तरह आंटी के इन रसीले मम्मों को मसल दूँ, निचोड़ दूँ,डरते-डरते मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और एक स्तन पर रख दिया,







जैसे ही हाथ लगा, पता चला कि आंटी ने नाइटी के अन्दर कुछ भी नहीं पहना था,मैं अपने एक हाथ से उनके एक स्तन को धीरे-धीरे दबाने लगा,जब कुछ भी विरोध नहीं हुआ तो मैं उनके दोनों दूध सहलाने लगा,कुछ देर तक यह सिलसिला चलता रहा,







फिर अचानक से आंटी ने करवट बदली,मुझे लगा कि अब तो हो गया काम,आज आंटी मेरी गांड फाड़ देंगी,लेकिन इसके बजाय उन्होंने खुद अपने दोनों हाथों से नाइटी की डोरी को खोलना शुरू कर दिया,यह सामने से खुलने वाली नाइटी थी जिसके सामने के दोनों पल्ले एक दूसरे के ऊपर चढ़ कर मम्मों को छिपाए रहते हैं,








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आंटी को यह करते देखकर मेरा हौसला सातवें आसमान पर पहुंच गया,डोरी आंटी ने खोल दी थी लेकिन दोनों पल्लों को यूं ही रहने दिया था,अब बाकी का काम मैंने कर दिया और फटाफट से उनकी नाइटी को सामने से खोल दिया,आह … उनके दूधिया चूचे मेरी आंखों के सामने थे और ब्राउन कलर के कड़क निप्पल मस्त लग रहे थे,







तभी आंटी ने आंखें खोलीं और मुस्कुरा कर चूचियां चूसने का इशारा कर दिया,मैं उनके नंगे बूब्स पर लगभग टूट पड़ा,मैं एक-एक करके उनके दोनों स्तनों को चूसने लगा,निप्पल को मुँह में लेकर खींचने लगा,आंटी भी पूरा साथ दे रही थीं,उनकी सांसें तेज हो रही थीं,







उनके दोनों मम्मों को चूसने का सिलसिला करीब दस मिनट तक चला,इस दौरान आंटी अपने हाथ से अपने दूध को मेरे मुँह में देती हुई सिसकार रही थीं और आह आह करती हुई मेरे सर को अपने सीने में दबाए जा रही थीं,फिर आंटी ने मेरी अंडरवियर उतारी और मेरा 6.5 इंच का कड़क लंड हाथ में लेकर सहलाने लगीं,







मेरे मजबूत लौड़े को हाथ में लेते ही आंटी बोलीं- अरे वाह साजन इतनी कम उम्र में तेरा लौड़ा तो घोड़े जितना मोटा-लंबा है रे!यह कह कर वे तुरंत नीचे को सरकीं और मेरे लौड़े को अपने गर्म मुँह में ले लिया,उनके मुँह की गर्मी और गर्म लार से मेरे लंड को मस्ती चढ़ने लगी और मैं आह आह करता हुआ उन्हें लंड चुसने का सुख देने लगा,






मैं अपना पूरा लंड आंटी के मुँह में पेलकर आंटी का मुँह चोदने लगा,आंटी भी पक्की चुसक्कड़ रांड जैसी थीं,उन्होंने पूरे दस मिनट तक मेरे लौड़े को ऐसे चूसा कि मेरा लौड़ा लोहे जैसा कड़क हो गया,अब मैंने उनकी नाइटी पूरी तरह से उनके बदन से उतार कर अलग कर दी,







पैंटी को भी खींचकर दूर फेंक दिया. अब आंटी पूरी नंगी थीं मैं उनके पैर के पंजों से लेकर होंठ तक हर अंग को चूमने-चाटने लगा,थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूत चाटनी शुरू कर दी,जीभ चुत के अन्दर तक डालकर चूस रहा था,आंटी बोलीं- नमकीन और खट्टी जैली चूस ले मेरी जान!,







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मैंने कहा- हां आंटी मैंने आपको चुत में उंगली करते देख लिया था आप अपनी चुत के रस को ही खट्टी जैली समझ कर चूस रही थीं न! आंटी हंस कर बोलीं- हां मुझे मालूम था कि तू खिड़की में से झांक कर मुझे देख रहा है क्योंकि मैं सामने लगे मिरर से तुझे देख रही थी,








मैं समझ गया कि आंटी जानबूझ कर मुझे अपनी चुदाई के लिए अपने साथ सोने के लिए बुला रही थीं,यह बात उन्होंने कह भी दी थी कि हां मैं तुम्हारे जवान लंड से अपनी चुत की आग बुझाना चाहती थी,मैं उनकी काम की प्यास को समझ गया था और चुत को जबरदस्त चाट चूस रहा था,







कुछ ही देर की चुत चुसाई के बाद आंटी तड़प उठीं और चिल्लाने लगीं- बस्स करो साजन अब नहीं सहा जाता … जल्दी डालो ना! मैंने कहा- थोड़ा और सब्र करो आंटी,मजा अभी बाकी है! लेकिन वे और बेकाबू हो गईं,वे बोलीं- आज तो तूने मुझे पागल कर दिया रे अब नहीं रुक सकती,







जो करना है फटाफट कर जल्दी से अपनी लंड मेरी चूत में पेल दे! वे खुद ही मेरा लंड पकड़कर आगे-पीछे करने लगीं,मैंने उन्हें 69 की पोजीशन में लिटाया,अपना मुँह उनकी चूत पर और अपना लंड उनके मुँह में ठूसा फिर एक ही झटके में अपने लंड को उनकी गीली चूत में पूरा घुसेड़ दिया और तेज-तेज धक्के मारने लगा,







लंड अन्दर लेते ही आंटी की तेज चीख निकल गई,मैंने उनके मुँह को दबाया और कहा- चिल्लाओ मत क्या पूरे मुहल्ले को बुलाना है आंटी जी! अब वे धीमी आवाज में बस एक ही आवाज निकाल रही थी- आह्ह ऊऊऊ  मईया मार डाला फाड़ दी चूत आह्ह्ह!,







कुछ देर बाद मैंने उन्हें सीधा लिटाया, दोनों टांगें कंधों पर रखीं और बीच में आकर फिर जोर-जोर से मैंने आंटी को चोदा,यह सिलसिला 15-20 मिनट तक चला,बाद में मैं लौड़े को चुत से निकाल कर उनके पेट पर झड़ गया,







वे मेरे लंड से चुदवा कर बेहद खुश हो गई थीं,उस पूरी रात में हमने तीन बार जबरदस्त चुदाई की और उसके बाद हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए,उसके बाद जब तक आंटी यहां रहीं,हम दोनों की चुदाई का यह सिलसिला चलता रहा, कहानी को अंत तक पढ़ने वालों का धन्यवाद…





Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं..



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