नमस्कार दोस्तो,यह कहानी मेरी पहली और सच्ची कहानी है चचेरी बहन की चुदाई की अगर कोई गलती हो तो माफ़ करना,मेरा नाम है आनंद और मैं गाजीपुर (उ.प्र.) से हूँ, मेरी उम्र 21 साल है और मेरी हाइट 5 फीट 9 इंच है,मैं दिखने में थोड़ा स्मार्ट हूँ,
ऐसा लोग कहते हैं। मैं अभी दिल्ली में रहता हूँ जहाँ मैं जॉब कर रहा हूँ,यह कहानी पांच साल पहले जून महीने की है। जब मैं छुट्टी में घर गया था। क्या बताऊँ दोस्तो, मैं अपने चाचा की लड़की यानि मेरी छोटी बहन (प्रिया) से पूरे दो साल बाद मिला था,
वो देखने में एकदम भोजपुरी स्टार अक्षरा सिंह जैसी लग रही थी,वो मुझ से डेढ़ साल छोटी है,उसका फिगर 34-32-36 था,मेरे चाचा जी आर्मी में हैं और मेरी चाची गृहिणी हैं. उनके तीन लड़के और दो लड़कियां हैं. चाचा बहुत कम ही घर पर रहते हैं. चाची अकेली घर का सारा काम करती है,
चाचा के न होने के कारण चाची ही खेत का काम भी करती थी,उस दिन बाहर खेतों में काम अधिक था इसलिए शाम को आते ही वह खाना खाकर सोने छत पर चली गयी, छत पर सबका बिस्तर लगा था,चाची के बगल में उनके तीन बच्चे सोये हुए थे,
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मेरा और चाचा के बड़े लड़के और प्रिया का बिस्तर दूसरी छत पर लगा हुआ था मैं और मेरे चाचा का लड़का सो रहे थे,कुछ देर बाद प्रिया सोने के लिए छत पर आई और मैं और चाचा का लड़का एक साथ सोये थे. प्रिया चाचा के लड़के बगल में आकर सो गई,
मेरे सोने के कुछ समय बाद मुझे अहसास हुआ कि मेरा हाथ कहीं जा रहा है,कुछ समय तक मैं सोने का नाटक करता रहा,मैं देखना चाहता था कि मेरा हाथ कौन टच कर रहा है,प्रिया ने मेरा हाथ अपनी चूची पर ले कर रख दिया,उसके बाद उसने कुछ समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं की क्योंकि भाई बीच में सोया था,
कुछ समय बाद वह अपनी चूची पर मेरा हाथ रख कर मसल रही थी,तभी भाई जग गया,भाई के जाग जाने के कारण अब हम दोनों में कोई भी हरकत नहीं करना चाह रहा था,प्रिया ने मेरा हाथ यूं का यूं रहने दिया,मुझे अब तक बहुत मजा आ रहा था लेकिन अब मेरी गांड भी फटने लगी थी कि कहीं भाई देख न ले,
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और प्रिया को छेड़ने का सारा इल्जाम मेरे सिर पर आ जाए, उसकी चूची पर से अब भी मेरा हाथ नहीं हटा था,फिर जब भाई दोबारा सो गया तो कुछ समय बाद मैंने उसकी कुर्ती के अन्दर हाथ डालकर चूची बहुत तेज दबा दी,इधर मेरा लन्ड खड़ा होने लगा,
कुछ समय बाद मैंने उसकी पजामी में हाथ डालना चाहा लेकिन उसने डालने नहीं दिया,शायद भाई बीच में सोया था इसलिए वो मुझे ऐसा नहीं करने देना चाहती थी,फिर मैंने कामुक बहन की पजामी के ऊपर से ही उसकी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया,
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कुछ समय बाद मुझे अपने हाथ पर पानी पानी सा लगा,उस समय तक वह झड़ चुकी थी,फिर वह उठ कर बैठ गई,उसके बाद मैंने उस रात कुछ नहीं किया और हम सो गए,अगले दिन हम दोपहर में टी.वी. देख रहे थे,उस समय घर पर छोटा भाई ही था और कोई नहीं था,
तभी उसने मेरी जांघों पर हाथ चलाना शुरू कर दिया. मैं उसके हाथों को बार-बार हटा रहा था क्योंकि दिन का मामला था और कोई भी आ सकता था,शाम हुई तो चाची खाना खाकर सोने गई. मैं टी.वी. देख रहा था,मैंने बोला- आप लोग सो जाओ. मैं टी.वी. देख कर सो जाऊंगा,
सभी लोग छत पर जाकर सोने लगे,कुछ समय बाद प्रिया छत से नीचे आई और मेरे बगल में बैठ गई,वह अपने हाथ कभी मेरे पैर पर तो कभी मेरे गाल पर चला रही थी। काफी देर तक वो ऐसे ही करती रही,मुझ से नहीं रहा गया और लाईट ऑफ करके मैंने प्रिया को अपने गोद में बैठा लिया,
उसकी चूचियों को खूब रगड़ा और किस करने लगा,लगभग पांच मिनट तक यही खेल चलता रहा,उसके बाद ऊपर से कोई आवाज आई और हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गए,मुझे भी प्रिया के साथ ये सब करने में बहुत मजा आ रहा था,मेरा लंड खड़ा हो गया था और मैं उसके हाथ में लंड देना चाह रहा था,
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लेकिन उसी वक्त फिर वो उठ कर चली गई. ऊपर छत पर जाने के बाद वो सो गई,अगले दिन प्रिया के तीनों भाई और बहन 9 बजे के करीब स्कूल चले गए,चाची किसी काम से बाजार गई थी.
उनके जाते ही मैंने दरवाजे को कुन्डी लगाई और अन्दर आकर देखा तो प्रिया खाना बना रही थी,
मैंने पीछे से जाकर प्रिया को पकड़ लिया,उसकी कुर्ती के ऊपर से उसके चूचों के साथ खेलना शुरू कर दिया,वो मुझे हटाने लगी लेकिन मैंने उसके चूचों को नहीं छोड़ा और उनको दबाता रहा. मेरा लंड खड़ा हो गया था और मैंने प्रिया की गांड पर अपना लंड लगा दिया था.
फिर उसने भी कुछ नहीं कहा और मैं आराम से प्रिया के चूचों को दबाने लगा. वो भी अब गर्म होने लगी थी,फिर मैंने उसकी कुर्ती को निकाल दिया. उसकी ब्रा को भी निकाल दिया. वो ऊपर से नंगी हो गई और मैं उसके चूचों को पीने लगा,
किचन में नंगी प्रिया के चूचों के साथ खेलते हुए मुझे भी जोश आने लगा था. मैंने उसकी चूचियों को जोर से पकड़ कर दबा दिया,बीच-बीच में मैं उसके चूचों के निप्पलों को काट भी लेता था. उसके मुंह से चीख सी निकल जाती थी लेकिन उसको भी मजा आ रहा था, आगे की कहानी अगले भाग में..
Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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