एक दिन मेरे कॉलेज जूनियर नीरज का फोन आया,उसने कहा- मेरी शादी तय हो गई है और तीन दिन बाद होनी है आपको शादी में आना ही होगा,मैंने आश्चर्य जताते हुए कहा- इतनी जल्दी कैसे? तू तो जवानी के खूब मजे लेना चाहता था फिर ये सब अचानक कैसे? उसने कहा- बात ही कुछ ऐसी है,मैंने कहा- क्यों, क्या हो गया कहीं तुझे प्यार-व्यार तो नहीं हो गया था न!
नीरज- अरे नहीं सर मुझे प्यार कभी हो ही नहीं सकता मैं- तो फिर बात क्या है? नीरज- अब क्या बताऊं सर, आप जानते तो हैं कि मैं कैसा हूँ मैं बिना चूत के रह नहीं पाता कॉलेज में भी हम दोनों ने मिलकर खूब मजा लिया था,आपने ही तो मुझे चोदना सिखाया था,मैंने उसे टोका- अबे मुद्दे पर आ! नीरज- हां सर वही सुना रहा था अब चुदाई की आदत हो गई तो क्या करता,चोदने के लिए एक भाभी को घर में ले आया,तब घर में कोई नहीं था,
सब गांव की किसी की शादी में गए हुए थे पर मेरी बहन की अचानक तबियत खराब होने की वजह से सब जल्दी वापस आ गए और घर वालों ने मुझे गांव की उस भाभी के साथ घर में ही रंगे हाथों पकड़ लिया,बस फिर क्या था,दादा जी ठहरे पुराने ख्यालात के उन्होंने मेरी शादी 40 किलोमीटर दूर एक गांव में तय कर दी वह भी मुझसे पूछे बिना,मैंने कहा- कोई बात नहीं,अब तू शादी के मजे ले. जब मन भर जाए,तो बाहर वाली तो हमेशा होंगी ही
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नीरज- नहीं सर, अब शादी के बाद सब बंद! मैं- क्यों, तेरी होने वाली बीवी इतनी अच्छी दिखती है क्या? नीरज- पता नहीं सर, मैंने तो उसे आज तक देखा नहीं बस मुझे तो उसका नाम रिया बताया गया है और ये बताया कि उसने अभी-अभी १२वीं पास किया है मैं- ऐसा क्यों? उसने कहा- हमारे यहां शादी से पहले लड़का-लड़की नहीं मिलते हैं,शादी घर वाले तय करते हैं ऊपर से इतनी जल्दी सब कुछ हुआ कि मुझे चुपके से भी जा कर देखने का मौका नहीं मिला,
अब चूंकि मैं कांड भी ऐसा कर बैठा था कि कहीं जाने का सवाल ही नहीं उठता था,अब तो घर में हमेशा ही मुझ पर सख्त पहरा लगा रहता है कि कहीं भाग न जाऊं कुछ देर तक नीरज अपना दुखड़ा रोता रहा और हम दोनों इधर उधर की बातें करते रहे,फिर मैं शादी से एक दिन पहले उसके गांव पहुंच गया,उस दिन हल्दी की रस्म थी,नीरज ने सभी रिश्तेदारों से मिलवाया,उसका परिवार बहुत बड़ा था,फिर नीरज मुझे अपने कमरे में ले गया और मेरा सामान उधर ही रखवा दिया,
मैं नहा धोकर हल्दी की रस्म के लिए तैयार हो गया,मैं उस दिन खूब नाचा,सबकी नजर बस मुझ पर ही थी,सब जान गए थे कि ये नीरज का दोस्त है तो अपने को तो पूरा भाव मिल रहा था,नाचते-नाचते रात हो गई तो सब काफी थक गए थे,मैंने मुँह हाथ धोकर खाना खाया और उस रात को नीरज के ही कमरे में आ गया. उससे कॉलेज के पुराने दिनों में हुई चुदाई के बातें करते-करते कब सो गया,पता नहीं चला,अगली सुबह मेरी नींद देर से टूटी,
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सब तैयार हो गए थे,मैं भी झटपट तैयार हो गया,फिर सब बारात के लिए निकल गए,लगभग डेढ़ घंटे में लड़की के घर पहुंच गए,सबका खूब स्वागत हुआ,अब शादी के लिए नीरज और उसकी दुल्हन दोनों मंडप में बैठे थे,मैंने लड़की को देखना चाहा पर देख ही नहीं पाया क्योंकि उसने घूंघट ओढ़ रखा था,लड़की को देखने की मेरी इच्छा अधूरी रह गई,शादी अच्छे से निपट गई,बस विदाई से पहले लड़की के पुराने आशिक के शराब पीकर तमाशा करने के कारण झगड़ा हो गया,
वो झगड़ा इतना बढ़ गया था कि नीरज को बीच में आकर झगड़ा सुलझाना पड़ा,अब हम बारात से वापस आ गए रात के दो बजे गए थे,घर आते ही नीरज और उस दुल्हान की आरती उतरी और उसका गृहप्रवेश हुआ,फिर सब अपने अपने घर चले गए और सभी रिश्तेदार भी एक-एक कर सोने चले गए,बस कुछ आंटी वगैरह ही बाहर बैठी थीं जो नीरज को सुहागरात को लेकर चिढ़ा रही थीं,वे आंटी लोग दूल्हे को सुहागरात वाले रूम में ढकेलने के लिए बची थीं,
तभी गांव की पुलिस गेट के पास आ गई और नीरज के पिता से बात होने लगी,यह देख कर नीरज और मैं भी गेट के पास आ गए. पुलिस वाले लड़ाई के केस के चक्कर में आए थे,बारात के लोगों ने उस शराबी लड़के को ज्यादा ही मार दिया था तो उसने नीरज के नाम से केस कर दिया था,लड़की के गांव के थाने में जाकर माफी मांग कर केस का निपटारा करना था,नीरज ने अपना सेहरा मुझे यह कहते हुए दिया कि किसी को मत बताना सब परेशान होंगे,
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मैं जल्द ही लौट आऊंगा,वह अपने बाप के साथ चला गया,इधर मैं दूल्हे का सेहरा थामे यह सोच रहा था कि तेरी पारी कब आयेगी गुरू.मैं सेहरा पहने घर के अन्दर आ गया,तभी नीरज के एक रिश्तेदार आंटी ने मुझे देखकर कहा- अरे दूल्हे राजा कहां घूम रहा है तुझे पता नहीं क्या कि आज तेरी सुहागरात है. तेरी दुल्हान तेरा इंतजार कर रही होगी चल अब देर ना कर जल्दी कमरे में जा मैं- अरे आंटी वो सुनिए तो मैं बस इतना ही कह पाया कि,
आंटी ने बिना कुछ सुने मुझे नीरज के सुहागरात वाले कमरे में धकेल दिया,मेरे अन्दर जाते ही मैंने देखा कि नीरज की दुल्हन खिड़की के पास खड़ी थी और चांद को देखे जा रही थी,खिड़की से चांद की हल्की रोशनी आ रही थी,उसने चुनरी नहीं ओढ़ी हुई थी,उसके बाल खुले हुए थे,खिड़की से हल्की-हल्की हवा अन्दर आ रही थी, जिसके कारण उसके लम्बे बाल हवा में उड़ रहे थे,वह जैसे अपने पिया का इंतजार कर रही थी,
मैंने अपने कदम उसकी तरफ बढ़ाए,मेरी आहट से वह तुरंत ही मेरी ओर मुड़ी और झट से जाकर सुहागरात वाले बेड पर बैठ गई,उसने चुनरी ओढ़ ली,इतनी सुंदर दुल्हन मैंने आज तक नहीं देखी थी,बड़ा ही प्यारा चेहरा, प्यारी प्यारी आंखें, आंखों में काजल, रसभरे होंठ और उनमें लाल लिपस्टिक,खुले लम्बे बाल थे,उसने लाल रंग का लहंगा चोली पहना हुआ था,गहरे गले वाली चोली में से उसके आधे से अधिक स्तन झांक रहे थे,
लहंगा और चोली के बीच में कुछ हिस्सा खुला हुआ था,जहां से उसका सपाट पेट दिख रहा था और बीचों बीच गहरी नाभि थी,लचक लिए हुई उसकी कमर को देख कर लंड खड़ा हो गया,यह सब देख कर मेरी तो नियत ही खराब हो गई,मेरा लंड अब अपना आकार लेने लगा था,नीरज की आज सुहागरात थी,पर वह यहां नहीं था,नीरज दो घंटे से पहले नहीं आने वाला था,चूंकि रात के 2 बज चुके थे तो नीरज के आते-आते सुबह हो जाने वाली थी,
मैं दुल्हन की सुहागरात खराब नहीं करना चाहता था,मैंने मौके का फायदा उठाना ही ठीक समझा,वैसे भी दुल्हन ने तो नीरज को देखा नहीं था और जब उसकी आंटी ही नहीं पहचानी, तो ये क्या पहचानती पर डर इस बात का था कि कहीं पहचान गई तो मेरी तो खटिया खड़ी हो जाएगी,मैंने खिड़की बंद की अब बहुत कम ही रोशनी अन्दर आ रही थी,मैं सेहरा खोलकर दुल्हन के पास बैठ गया,मैंने उसके सर से चुनरी हटाई,उसने सर झुकाया हुआ था,
फिर मैंने उसके हाथ अपने हाथ में ले लिए और अपने होंठों को उसके हाथ पर लगा दिया,उसने कुछ नहीं कहा मैंने मन में कहा कि चलो, अब काम बन गया दुल्हन ने नहीं पहचाना,फिर मैं आगे बढ़ा और उसकी गर्दन को चूमने लगा,उसने चेहरा दूसरी तरफ कर दिया,मतलब वह समझ गई कि क्या होने वाला है,आखिर उसे भी इस पल का कब से इंतजार रहा होगा, आगे जो भी हुआ अगले भाग में…
Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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