यह कहानी मेरे दोस्त की माँ और बुआ की चुदाई की है,यह बात आज से १६–२० वर्ष पहले की है जब मेरी उम्र २०–२२ साल की थीं उन दिनों मैं मुम्बई में रहता था,मेरे मकान के बगल में एक नया किरायेदार रवि रहने आया,
वो किराये के मकान में अकेला रहता था,मेरी हमउम्र का था इसलिए हम दोनों में गहरी दोस्ती हो गई. वो मुझ पर अधिक विश्वास रखता था क्योंकि मैं एक सरकारी कर्मचारी था और उससे ज्यादा पढ़ा लिखा था,वो एक निजी फैक्ट्री मे मशीन ऑपरेटर था,उसके परिवर में केवल 4 सदस्य थे,
उसकी विधवा माँ 41 साल की, विधवा बुआ (यानी कि उसकी माँ की सगी ननद) 35 साल की और उसकी कुँवारी बहन 18-19 साल की थीं. वे सब उसके गाँव में रहकर अपनी खेती बाड़ी करते थे,दीवाली की छुट्टियों में उसकी माँ और बहन मुम्बई में 1 महीने के लिये आए हुए थे,
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दिसम्बर में उसकी माँ और बहन वापस गाँव जाने की जिद्द करने लगे,लेकिन काम अत्यधिक होने के कारण रवि को 2 महीने तक कोई भी छुट्टी नहीं मिल सकती थीं. इसलिए वो परेशान रहने लगा,वो चाहता था कि किसी का गाँव तक साथ हो तो वो माँ और बहन को उसके साथ भेज सकता है,
लेकिन किसी का भी साथ नहीं मिला, रवि को परेशानी में देख कर मैंने पूछा,क्या बात है रवि?आज कल तुम ज्यादा परेशान रहते हो! रवि: क्या करूं यार, काम ज्यादा होने के कारण मेरे ऑफ़िस में मुझे अगले 2 महीने तक छुट्टी नहीं मिल रही है और इधर माँ गाँव जाने की जिद कर रही हैं,
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मैं चाहता हूँ कि, अगर कोई गाँव तक किसी का साथ रहे तो माँ और बहन अच्छी तरह से गाँव पहुँच जायेंगी और मुझे भी चिन्ता नहीं रहेगी,लेकिन गाँव तक का कोई भी साथ नहीं मिल रहा है ना ही मुझे छुट्टी मिल रही है,इसलिए मैं काफ़ी परेशान हूँ,दीनू: यार अगर तुम्हे ऐतराज ना हो तो,
मैं तुम्हारी परेशानी का हल कर सकता हूँ और मेरा भी फ़ायदा हो जायेगा.रवि: यार, मैं तुम्हारा यह एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा! अगर तुम मेरी परेशानी हल कर दो तो. लेकिन यार, तुम कैसे मेरी परेशानी हल करोगे और कैसे तुम्हारा फ़ायदा होगा?यार, सरकारी दफ्तर के अनुसार मुझे साल में 1 महीने की छुट्टी मिलती है,
अगर मैं छुट्टी लेता हूँ तो मुझे गाँव या कही भी जाने का,आने जाने का किराया भी मिलता है और एक महीने की पगार भी मिलती है. अगर मैं छुट्टी ना लूँ तो,1 महीने की छुट्टी समाप्त हो जाती है और कुछ नहीं मिलता है, रवि: यार, तुम छुट्टी लेकर माँ और बहन को गाँव पहुँचा दो,इस बहाने तुम मेरा गाँव भी घूम आना,
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अगले दीनू से मैंने छुट्टी के लिए आवेदन पत्र दे दिया और मेरी छुट्टी मंजूर हो गई, रवि ने साधारण टिकट लेकर हम दोनों को रेलवे स्टेशन पहुँचाने आया. हमने टीटी से विनती कर के किसी तरह बर्थ की 2 सीट ले ली,गाड़ी करीब रात 8:40 पर रवाना हुई,रात करिब 10 बजे हमने खाना खाया और गपशप करने लगे,
बहन ने कहा, भैया मुझे नींद आ रही है! और वो उपर के बर्थ पर सो गई कुछ देर बाद माँ भी नीचे के बर्थ पर चादर ओढ़ कर सो गई और कहा कि, तुम अगर सोना चाहते हो तो मेरे पैर के पास सिर रख कर सो जाना,मुझे भी थोड़ी देर बाद नींद आने लगी और मैं उनके पैर के पास सिर रख कर सो गया,
सोने से पहले मैंने पैंट खोल कर शोर्ट पहन लिया माँ अपने बाईं तरफ़ करवट कर के सो गईं कुछ देर बाद मुझे भी नींद आने लगी और मैं भी उनकी चादर ओढ़ कर सो गया,अचानक! रात करीब 1:30 मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि, माँ की साड़ी कमर के उपर थीं और उनकी चूत घनी झांटों के बीच छुपी थीं,
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उनका हाथ मेरे शोर्ट पर लण्ड के करीब था,यह सब देख कर मेरा लण्ड शोर्ट के अन्दर फड़फड़ाने लगा,मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा था कि, क्या करूँ. मैं उठकर पेशाब करने चला गया,जब वापस आया मैंने चादर उठा कर देखा कि, माँ अभी तक उसी अवस्था में सोई थीं,
मैं भी उनकी तरफ़ करवट कर के सो गया,लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थीं,मेरे लण्ड से माँ की चूत का मिलन बार बार मेरी आँखों के सामने उनकी चूत घूम रही थी,थोड़ी देर बाद एक स्टेशन आया. वहाँ 5 मिनट तक ट्रेन रुकी थी और, मैं विचार कर रहा था कि क्या करूँ!
जैसे ही गाड़ी चली मेरे भाग्य ने साथ दिया और हमारे डिब्बे की लाईट चली गई,मैंने सोचा कि,भगवान भी मेरा साथ दे रहा है,मैंने अपना लण्ड शोर्ट से निकल कर लण्ड के सुपाड़े की टोपी नीचे सरका कर सुपाड़े पर ढेर सारा थूक लगा कर सुपाड़े को चूत के मुख के पास रख कर सोने का नाटक करने लगा,
गाड़ी के धक्के के कारण आधा सुपाड़ा उनकी चूत में चला गया लेकिन, माँ की तरफ़ से कोई भी हरकत ना हुई. या तो वो गहरी नींद में थीं, या वो जानबूझ कर कोई हरकत नहीं कर रही थीं,मैं समझ नहीं पाया,गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा चूत में अन्दर बाहर हो रहा था,
एक बार तो मेरा दिल हुआ कि, एक धक्का लगा कर पूरा का पूरा लण्ड चूत में डाल दूँ.लेकिन संकोच और डर के कारण मेरी हिम्मत नहीं हुई,गाड़ी के धक्के से केवल सुपाड़े का थोड़ा सा हिस्सा चूत में अन्दर बाहर हो रहा था,इस तरह चोदते चोदते मेरे लण्ड ने ढेर सारा फ़व्वारा उनकी चूत और झांटों के ऊपर निकाल दिया,
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अब मैं अपना लण्ड शोर्ट में डाल कर सो गया,करीब सवेरे 7 बजे माँ ने उठाया और कहा कि, चाय पिलो और तैयार हो जाओ क्योंकि 1 घन्टे में हमारा स्टेशन आने वाला है,मैं फ़्रेश हो कर तैयार हो गया.स्टेशन आने तक माँ बहन और मैं इधर उधर की बातें करने लगे,करीब 09:30 बजे हम रवि के घर पहुँचे,
वहाँ पर रवि की बुआ ने हमारा स्वागत किया और कहा- नहा धोकर नाश्ता कर लो.हम नहा धोकर आँगन में बैठ कर नाश्ता करने लगे,करीब 11:00 बजे बुआ ने माँ से कहा- भाभी जी आप लोग थक गए होंगे, आप आराम कीजिये मैं खेत में जा रही हूँ और मैं शाम को लौटूंगी,
माँ ने कहा, ठीक है! और मुझसे बोली, अगर तुम आराम करना चाहो तो आराम कर लो नहीं तो बुआ के साथ जा कर खेत देख लेना,मैंने कहा कि, मैं आराम नहीं करुगा क्योंकि मेरी नींद पूरी हो गई है! मैं बुआ जी के साथ खेत चला जाता हूँ,वहाँ पर मेरा समय भी पास हो जायेगा,
मैं और बुआ खेत की ओर निकल पड़े. रास्ते में हम लोगों ने इधर उधर की काफ़ी बातें की उनका खेत बहुत बड़ा था. खेत की एक कोने मे एक छोटा सा मकान भी था,दोपहर होने के कारण आजू बाजू के खेत में कोई भी न था,खेत पहुँच कर बुआ जी काम में लग गईं और कहा कि,
तुम्हे अगर गर्मी लग रही हो तो शर्ट निकाल लो उस मकान में लुंगी भी है चाहे तो,लुंगी पहन लो और यहाँ आकर मेरी थोड़ी मदद कर दो,मैं मकान में जाकर शर्ट उतार दिया और लुंगी बनियान पहनकर बुआ जी के काम में मदद करने लगा,काम करते करते कभी-कभी मेरा हाथ बुआ जी के चूतड़ पर भी टच होता था,
कुछ देर बाद बुआ जी से मैंने पूछा- बुआ जी यहाँ कहीं पेशाब करने की जगह है?बुआ जी बोली- मकान के पीछे झाड़ियों में जाकर कर लो,मैं जब पेशाब कर के वापस आया तो देखा बुआ जी अब भी काम कर रही थीं,थोड़ी देर बाद बुआ जी बोलीं- आओ अब खाना खाते हैं और थोड़ी देर आराम कर के फ़िर काम में लग जाएँगे,
अब हम खेत के कोने वाले मकान में आकर खाना खाने की तैयारी करने लगे,मैं और बुआ दोनों ने पहले हाथ पैर धोये फिर खाना खाने बैठ गए,बुआ जी मेरे सामने ही बैठ कर खाना खा रही थीं,खाना खाते समय मैंने देखा कि, मेरी लुंगी जरा साईड में हट गई थी,
जिस कारण मेरी चड्डी से आधा निकला हुआ लण्ड दिखाई दे रहा था और बुआ जी की नज़र बार बार मेरे लण्ड पर जा रही थी. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा और, बीच बीच में उनकी नज़र मेरे लण्ड पर ही जा रही थीं,खाना खाने के बाद बुआ जी बरतन धोने लगीं जब वो झुक कर बरतन धो रही थीं,
तो मुझे उनके बड़े बड़े बूब्स साफ़ नज़र आ रहे थे,उन्होंने केवल ब्लाऊज़ पहना हुआ था,बरतन धोने के बाद वो कमरे में आकर चटाई बिछा दी और बोलीं चलो थोड़ी देर आराम करते है मैं चटाई पर आकर लेट गया,बुआ बोलीं- बेटा! आज तो बड़ी गर्मी है!कह कर उन्होंने अपनी साड़ी खोल दी,
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और केवल पेटीकोट और ब्लाऊज़ पहन कर मेरे बगल में आकर उस तरफ़ करवट कर के लेट गईं,अचानक! मेरी नज़र उनके पेटीकोट पर गई,उनकी दाहिनी ओर की कमर पर जहाँ पेटीकोट का नाड़ा बंधा था वहा पर काफ़ी गेप था और, गेप से मैंने उनकी कुछ कुछ झांटे दिखाई दे रही थी,
अब मेरा लण्ड लुंगी के अन्दर हरकत करने लगा,थोड़ी देर बाद बुआ जी ने करवट बदली तो मैंने तुरंत आँखें बंद करके सोने का नाटक करने लगा,थोड़ी देर बाद बुआ जी उठीं और मकान के पीछे चल पड़ीं,मैं उत्साह के कारण मकान की खिड़की पर गया. खिड़की बंद थीं,लेकिन उसमे एक सुराख था,
मैं सुराख पर आँख लगाकर देखा तो मकान का पिछला भाग साफ़ दिखाई दे रहा था. बुआ वहाँ बैठ कर पेशाब करने लगी,सब करने के बाद बुआ जी थोड़ी देर अपनी चूत सहलाती रही फिर, उठकर मकान के अन्दर आने लगी,फ़िर मैं तुरंत ही अपनी स्थान पर आकर लेट गया,
बुआ जी जब वापस मकान में आईं तो, मैं भी उठकर पिछली तरफ़ पेशाब करने चला गया,मैं जान बूझ कर खिड़की की तरफ़ लण्ड पकड़ कर पेशाब करने लगा,मैंने महसूस किया कि खिड़की थोड़ी खुली हुई थी और बुआ जी की नज़र मेरे लण्ड पर थी,पेशाब करके जब वापस आया तो देखा,
बुआ जी चित लेटी हुई थीं. मेरे आने के बाद बुआ बोलीं बेटा आज मेरी कमर बहुत दुख रही है क्या तुम मेरी कमर की मालिश कर सकते हो?मैंने कहा- क्यों नहीं!उसने कहा, ठीक है! सामने तेल की शीशी पड़ी है उसे लगा कर मेरी कमर की मालिश कर देना, और फिर वो पेट के बल लेट गईं,
मैं तेल लगा कर उनकी कमर की मालिश करने लगा,वो बोली- बेटा थोड़ा नीचे मालिश करो,मैंने कहा- बुआ जी थोड़ा पेटीकोट का नाड़ा ढीला करोगी तो मालिश करने में आसानी होगी और पेटीकोट पर तेल भी नहीं लगेगा,बुआ जी ने पेटीकोट का नाड़ा ढीला कर दिया,
अब मैं उनकी कमर पर मालिश करने लगा,उन्होंने और थोड़ा नीचे मालिश करने को कहा,मैं थोड़ा नीचे की तरफ़ मालिश करने लगा,अचानक मेरा हाथ फिसल गया और बुआ जी का पेटी को कूल्हों से नीचे हो गया,उनके बड़े बड़े कूल्हे देखने लगे, मैने कहा माफ करना बुआ जी वो तेल की वजह मेरा हाथ फिसल गया था,
बुआ जी ने मेरी और देखा वो मुस्कराई मुझे बाहों में भर लिया जो मैं भी चाहता था,मैं बुआ जी के दोनों बूब्स को दबाने लगा,बुआ जी आहान अहह अहह करने लगी, मैं उनकी चूत को सहलाने लगा,जो गीली हो चुकी थी, मैंने उनके ब्लाउज को उतार दिया, तने ओर कसी हुई उनकी चूचियां तन गई, उनके निप्पल को जीभ से चाटने लगा,
बुआ जी पेटीकोट को उतार दिया,वो पूरी नंगी हो गई,ओर कहने लगी आयो चोद मुझे मसल दो मेरी प्यासी चूत को,मैंने लंड निकाल कर बुआ जी की चूत मैं डाल दिया,उनकी चूत कसी हुई थी लेकिन तेल की वजह से लंड आसानी से अंदर चला गया, लंड जाते ही बुआ जी चिल्ला उठी उई मां मार्ररर्र्र गई, उनकी चुचियों को दबाने के बाद उनका दर्द कम हुआ,
फिर मैंने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया, बुआ जी हर चोट का मज़ा ले रही थी, लगता है बहुत दिनों से उनको लंड नहीं मिला था, मैंने तेज़ी लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया, बुआ जी आहान अहह अहह ओह ओह्ह.. कर रही थी,कुछ देर चुदाई के बाद मेरा मॉल निकल गया, सारा मॉल मैंने हुआ जी की जांघों पर गिरा दिया,कहानी को अंत पढ़ने वालों का धन्यवाद…
Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए….
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