नमस्कार दोस्तों मैं दिल्ली से रीना शर्मा हूँ,२३ साल की और मेरा फिगर साइज़ 34-32-28 है,मैं सेक्स की बहुत बड़ी शौकीन हूँ। आज मैं आप सबके लिए एक हॉट सेक्स स्टोरी लेकर आई हूँ। उम्मीद है कि आप सबके लंड फिर से खड़े हो गए होंगे,यह कहानी पिछले हफ़्ते की है,मेरे पापा ने मुझे एक कार दिलाई थी,इसलिए मैं रोज़ ड्राइव पर जाती थी,या यूँ कहूँ कि अपनी चूत की प्यास
बुझाने जाती थी। एक शाम पापा ने मुझसे कहा-पापा: रीना, तैयार हो जाओ,हमें एक ऑफिस पार्टी में जाना है,पहले तो मैंने माना किया,लेकिन फिर मान गई,पार्टी के लिए मैंने एक गाउन पहना, और अपनी आदत के मुताबिक मैंने ब्रा या पैंटी नहीं पहनी हम सब कार से पार्टी हॉल गए,मैंने पार्किंग में कार खड़ी की फिर मैं अपने माता-पिता के साथ हॉल के अंदर गई,वहां पहले से ही काफी लोग तैनात थे,पापा ने मुझे और मां को अपने बॉस से
मिलवाया,पापा के बॉस लगभग ४० साल के लग रहे थे,लेकिन उनकी सेहत काफी अच्छी थी हम सब ने एक-दूसरे से मुलाकात की,जब मैंने पापा के बॉस को गले लगाया,तो उनका एक हाथ मेरे कूल्हों पर आ गया,फिर उन्होंने मेरे कान में फुसफुसा कर कहा-बॉस: तुम बहुत सेक्सी लग रही हो,मैंने कुछ नहीं कहा और उनसे मुँह फेर लिया,मैं अंकल का नाम बताना भूल गई थी उनका नाम मुकेश है लोगों से मिलने-जुलने में बिज़ी होने के बावजूद उनकी
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नज़रें मुझ पर ही टिकी थीं। मुझे भी अंदर ही अंदर अच्छा लग रहा था। सब लोग पार्टी का मज़ा ले रहे थे मां और पापा भी डांस कर रहे थे मैं एक टेबल पर अकेली बैठी थी तभी मुकेश अंकल मेरे पास आए और बोले-अंकल: सेक्सी,क्या तुम्हें मज़ा नहीं आ रहा है? मैंने अंकल से कहा: मेरा नाम रीना है, ‘सेक्सी’ नहीं,इस पर अंकल बोले, “तुम इस पार्टी में सबसे ज़्यादा सेक्सी हो,क्या तुम्हें पार्टी पसंद नहीं आ रही,जो तुम अकेली बैठी हो?”
मैंने कहा: अंकल, पार्टी तो बहुत अच्छी है,अंकल बोले:अगर बोर हो रही हो तो मेरे साथ चलो,मैं जाने के लिए मान गई,अंकल मुझे पार्टी हॉल से दूसरी मंज़िल पर ले गए,वहां हम दोनों एक कमरे में गए,मैंने अंकल से पूछा:अंकल,आप मुझे इस कमरे में क्यों लाए हैं? अंकल ने दरवाज़ा बंद करते हुए कहा:मैं चाहता हूँ कि तुम असली मज़ा लो,फिर उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी बाहों में ले लिया मैंने ऐसा नाटक करना शुरू किया
जैसे मैं अंकल से छूटने की कोशिश कर रही हूँ अंकल ने मेरा सिर पकड़ा और अपने होंठों मेरे होंठों पर रख दिए,फिर मेरे होंठों को चूमने लगे,होंठ छूते हुए अंकल के हाथ मेरे गांड को भी दबा रहे थे मैं भी उत्तेजित हो रही थी इसलिए मैंने भी अंकल को चूमना शुरू कर दिया,अब अंकल गाउन के ऊपर से मेरे बूब्स को दबाने लगे, तो मैंने उन्हें रोक दिया,फिर मैं पीछे मुड़ी और अंकल से कहा-
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मैंने कहा: गाउन की ज़िप खोल दो,अंकल ने ज़िप खोली,अपने हाथ गाउन के अंदर डाले और मेरे बूब्स को दबाने लगे अंकल का लंड भी खड़ा था और मेरी गांड में चुभ रहा था,कुछ देर बाद अंकल ने मुझे पूरी तरह नंगा कर दिया और मेरे बूब्स पर टूट पड़े,फिर अंकल भी पूरी तरह नंगे हो गए,उनका लंड काफी बड़ा और मोटा था,मैं खुद ही नीचे बैठ गई और उनके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी,अंकल आह अहह ओह ओह्ह आह्ह करने लगे,
थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे उठाया,मेरे होंठों को छुआ और मुझे बिस्तर की तरफ ले गए,मैं बिस्तर पर ले गई,अंकल मेरी चूत के पास आए और अपना मुँह रख कर उसे चाटने लगे,उनके हाथ मेरे स्तनों को सहला रहे थे,मैं अंकल के सर को अपनी चूत की तरफ दबा रही थी,कुछ देर बाद मेरी चूत से पानी निकालने लगा,अंकल ने उस पानी को चाट कर पी लिया,मुझे थोड़ा सुकून मिलने लगा। फिर अंकल ने मेरे चूचियों को अपने मुँह में लिया और चूसने लगे,अंकल का लंड मेरी चूत को छू रहा था,इसलिए मैंने उनसे कहा:
अब इसे अंदर डाल भी दो, मुझे और तड़पाओ मत अंकल ने मेरी बात सुनी फिर अपना लंड मेरी चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर डाल दिया,मैं चीख पड़ी,लेकिन नीचे डीजे बज रहा था, तो मेरी आवाज़ कौन सुनता? फिर अंकल अपने लंड को अंदर-बाहर करने लगे,मुझे भी मज़ा आने लगा,इसलिए मैंने अंकल को कस कर अपनी बाहों में भर लिया और अपने पैर उनकी कमर के चारों तरफ लपेट लिए,अंकल लगातार मुझे चोद रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे अंकल काफी समय से भूखे थे,उनका लंड मेरे गर्भ
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तक पहुँच रहा था,काफी देर बाद अंकल ने मुझे घोड़ी की तरह (घुटनों और हाथों के बाल) झुका दिया,फिर से अपना लंड मेरी चूत में डाला और छोड़ने लगे,अब अंकल चोदने के साथ-साथ मेरी गांड पर थप्पड़ भी मार रहे थे और लगातार मेरी चूत को चोद रहे थे,मैं 3 बार झड़ चुकी थी,लेकिन अंकल को चोदने में बहुत मज़ा आ रहा था,कुछ देर बाद अंकल का लंड पानी छोड़ने लगा,मेरी चूत उनके पानी से पूरी तरह भर गई थी,अंकल का लंड ढीला पड़ गया और बाहर आ गया और मैं बिस्तर पर लेट गई,
फिर अंकल ने अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया,मैंने अपना मुँह खोला और उसे चूसने लगी,मैंने उनके लंड को अच्छी तरह से साफ किया,अंकल ने फिर से मेरे बूब्स को चुसना शुरू कर दिया। मैं उनके बालों को सहलाने लगी,अंकल बोले,“रीना,तुम सिर्फ सेक्सी ही नहीं हो,बल्कि अंदर से भी बहुत हॉट हो,तुम्हारे साथ सेक्स करने में बहुत मज़ा आता है,आज तुम्हारे पापा तुम्हें पार्टी में ले आए,उन्होंने तो मेरी ज़िंदगी ही बना दी।”
तो मैंने कहा: फिर आप पापा की सैलरी बढ़ा दीजिए,अंकल बोले: लो बढ़ा दी है! मैंने उनकी सैलरी भी बढ़ाई है और उन्हें प्रमोट भी किया है,मैं बहुत खुश हुई,मैंने अंकल का लंड अपने हाथ में लिया और उसे हिलाने लगी कुछ ही देर में उनका लंड फिर से खड़ा हो गया,मैं उनके लंड के और करीब गई,उसे अपने मुँह में लिया और चूसने लगी,अंकल का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया,मैंने अंकल को लिटाया,उनके ऊपर चढ़ गई,उनके लंड को अपनी चूत पर रखा और उस पर बैठ गई मैंने अपनी कमर ऊपर उठाई
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और उनके लंड को अपनी चूत के अंदर लेने लगी। अंकल मेरे लटकते हुए स्तनों को चुनने लगे,उन्होंने अपने हाथों से मेरी कमर को ऊपर उठाया और मुझे अपने लंड पर ऊपर-नीचे करने लगे। कुछ देर बाद मैं फिर से एक घोड़ी की तरह हो गई,अंकल बोले: रीना,अब मुझे इसे तुम्हारी गांड में डालना है,बिना देर किए मैंने अपने दोनों हाथों से अपनी गांड को फैला दिया,अब अंकल को मेरी गांड का छेद साफ दिख रहा था,उन्होंने वहां अपना थूक लगाया,अपना लंड रखा, और उसे मेरी गांड के अंदर डाल दिया,
मैं फिर से चिल्लाई,लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ,अंकल बड़े प्यार से मेरी गांड में धक्के लगाने लगे,उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मुझे पूरी तरह से एक घोड़ी बना दिया,फिर मेरे बालों को पकड़कर ही मुझ पर सवार हो गए,काफी देर तक सेक्स करने के बाद अंकल ने अपनी वीर्य से मेरी गांड भर दी,फिर मैंने अंकल के लंड को चाट कर साफ कर दिया,मेरी नज़र दीवार पर लगी घड़ी पर पड़ी,११:३० बजे थे,तो मैंने अंकल से कहा,“काफ़ी समय हो गया है,
अब हमें निकलना चाहिए,वरना मम्मी-पापा परेशान हो जाएंगे।”अंकल बोले: ठीक है,फिर हम दोनों ने कपड़े पहने,हमने एक-दूसरे को अपने नंबर दिए और नीचे आ गए,अंकल और मैंने साथ में डिनर किया,फिर मैं मम्मी और पापा को लेकर घर आ गई,कहानी को अंत तक पढ़ने वालों का धन्यवाद..
Note ये कहानी सत्या घटना केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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