हेलो दोस्तों मेरा नाम संगीता हैं और दिल्ली को रहनी वाली हूं, आज मैं आप को मेरे भाई के साथ चुदाई की कहानी बताने जा रही हूं,
ये बात आज से दस साल पहले की है, उस समय मेरी उम्र 25 साल की थी मेरा बदन भी उभरा हुआ था , मेरे बूब्स का साइज 36 और गांड 34 की हुआ करती थी,
वैसे तो मेरा भाई शादीशुदा था, लेकिन फिर भी वो मुझे अजीब नज़र से देखा करता था, वो हर रोज शराब पी कर आता था, हमारे परिवार वाले सभी उसे परेशान थे,
कई बार वो इतनी पी लेता था के मैं और भाभी उसे सहारा दे कर कमरे तक लाया करते थे, एक बार तो भाई ने इतनी पी रखी थी के मैं उन्हे सभालने के लिए गई तो वो मुझे से ही लिपट गया,
और भाभी भी ये सब देख कर दूर से हस रही थी, और भाई तो मेरे संतरे दबाने लगा था, मैने किसी तरह भाई को दूर किया,
अगली सुबह जब मैने पूछा तो भाई ने जवाब दिया मुझे कुछ याद नहीं है अगर मैने कुछ नशे में बोला है तो माफ कर देना बोल कर चला गया,
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए ,फिर एक दिन भाभी अपने मायके चली गई, अभी भी भाई शराब पी कर आता था और मुझे अकेले ही भाई को कमरे में छोड़ना पड़ता था,
मेरे परिवार में भाई कोई भी पसंद नही करता था, मुझे उसकी फिकर रहती थी क्यू की मेरा भाई था,अब हर रोज मैं भाई को कमरे में छोड़ने के बाद ही सोने जाति थी मेरा कमरा भी ऊपर था और भाई के कमरे के साथ था,
जब भी मैं भाई को संभालने के लिए उसका हाथ अपने कंधों पर रखती उसके हाथ से मेरे बूब्स दब जाते और मेरे बदन ने आग लग जाती,
अब ये हर रोज होने लगा और मुझे इस में मज़ा आने लगा, फिर मैने सोचा क्यों न भाई को मजबूर किया जाए ताकि वो मेरी चुदाई कर सके, अगले सुबह मैंने कमरे का दरवाजा थोड़ा खुला छोड़ दिया,
ताकि भाई मुझे सोता हुआ देख सके, रात को भाई के आने के बाद मैंने उसके हाथो से अपने बूब्स दबवाये उसके बाद कमरे में चली गई,
मैने सुबह होते ही अपने कपड़े जांघों तक ऊपर कर लिए और बूब्स को खुले छोड़ दिए,और सोने का बहाना करते हुए ऐसे लेती रही, तभी भाई मेरे कमरे के सामने से जाने लगा,
मुझे इस हालत में देख कर भाई वही खड़ा हो गया और अपनी आंखे सेंकने लगा, मैं उसे हल्की आंख से देख रही थी, वो मेरी जांघों को और बूब्स की दरार को देखें जा रहा था,
फिर वो अपने लंड को ऊपर से ही सहलाने लगा, मैं तो बिल्कुल दंग रह गई के मेरा भाई मुझे चोदना चाहता है, फिर उसने लंड को पेंट से बाहर निकल कर मुठ मारने लगा,
उसका लंड सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा था, इतने मोटे लंड को देख कर मेरे अंदर भी आग लग गई, मैंने करवट लेते हुए एक टांग को ऊपर उठा लिया,
अब भाई को मेरी पेंटी दिखने लगी थी पेंटी को देख कर भाई और जोर से मुठ मारने लगा, फिर उसका वीर्य निकल गया और भाई भी उसी वक्त घर से चला गया,
भाई तो चला गया लेकिन अब मेरे बदन में आग लग चुकी थी, अपनी उंगलियों को मैं अंदर बाहर करने लगी, खुद को शांत करने के बाद मैने सोच लिया आज रात तो भाई से चुदाई करवानी है,
फिर उसी रात भाई शराब पी कर आया जैसे हर रात आता था, लेकिन आज भाई ने बहुत ज़्यादा पी रखी थी और बहुत देरी से घर आया, घर के लोग लगभग सो गए थे,
भाई ने आते ही दरवाजा पीटने लगा, मैं जल्दी से नीचे गई भाई को संभालने क्यू की मेरा रोज का यही काम था, आज मैंने न ही ब्रा पहनी थी ना ही पेंटी और अपने बूब्स को भी ऊपर से खुला रखा हुआ था,
भाई को संभालने हुए उसका हाथ मैंने अपने कंधे पर रखा और ऊपर लेकर जाने लगी, भाई का हाथ मेरे चुचियों पर था और मुझे लग भी रहा था के आज भाई का हाथ ज्यादा ही छू रहा है,
लेकिन भाई तो मेरे चुचियों को दबा रहा था वो नशे में जरुर था लेकिन उसे भी पता था के वो क्या कर रहा है, मैने अपने हाथ से भाई की कमर पकड़ रखी थी और ऐसे ही ले कर आ रहीं थी,
भाई का एक हाथ मेरी छाती पर तो दूसरा हाथ मेरे पेट पर था, अब उसका हाथ पेट से मेरी योनि की तरफ़ जा रहा था और भाई ऊपर से ही मेरी चूत को रब कर रहा था,
भाई की उंगली अब मेरी चूत की दरार के बीच में आ चुकी थी, पता मुझे भी है और भाई को भी के चल क्या रहा है, उसके सपरश से मैं अब गर्म हो चुकी थी,
अब सीढ़ियों से ऊपर जाने लगे तो, भाई वही पर बैठ गया और मुझे अपनी तरफ खींच कर बिठा दिया और मेरे होठों को चूमने लगा, मैंने भी भाई को अपनी बाहों में भर लिया और भाई को चूमने लगी,
Note: कहानी सत्या घटना है केवल नाम ओर स्थान बदले हुए हैं…desi adult stories
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