मेरा नाम विजय हैं मैं दिल्ली का रहने वाला हूं, मेरी फेमिली में मम्मी पापा और छोटा भाई है ,मेरे पापा के एक बड़े भाई है जो उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहते हैं हम बहुत कम ही गांव जाते हैं क्योंकि हमें कई साल हो गए दिल्ली में रहते हुए ,
यह कहानी उस समय की हैं जब मेरे ताऊ के बेटे (मेरे पिता के बड़े भाई के बेटे ) की शादी होने वाली थीं, उसका नाम रोहन था, पूरे परिवार के साथ हम यूपी चले गए, पहले दिन मैं वहां पर बहुत बोर हो रहा था मेरा बिलकुल भी मन नही लग रहा था, मैं अपने घरवाले से झगड़ा करने लगा के इतना जल्दी आने की क्या जरूर थी शादी को अभी बहुत वक्त हैं,
हमारी बातें सुनकर रोहन वहा आया बोला कोई बात नही चल मैं तुझे गांव दिखा लाता हूं, उसको मैं कुछ कहना नही चाहता था इस लिए मैं चुपचाप उसके साथ चल दिया, वो मुझे गांव दिखाते हुए बाइक से लेकर जा रहा था,
ये ज़मीन हमारी हैं ये पड़ोसी की ये सब बातें कर रहा था मुझे कुछ भी अच्छा नही लग रहा था, फिर हम बाजार में पहुंचे वहा चाय पीने के बाद रोहन मुझे दूसरे रास्ते से घर ला रहा था मैंने पूछा ये कौन सा रास्ता है घर तो दूसरा था बोला ये वाला भी घर को जाता है मैंने बोला ठीक है,
इस तरफ एक बहुत बड़ी नदी थी , फिर मैंने रोहन को बाइक रोकने के लिए बोला उसने पुल के ऊपर बाइक रोक दी, मैं ऐसे इधर उधर देखने लगा तो देखा कुछ लड़कियां नदी के किनारे कपड़े धो रही थी ओर साथ में मस्ती भी कर रहीं थी, एक दूसरे के ऊपर पानी डाल रही थी उन में से एक लड़की जिसका नाम सीमा था, वो देखने में बहुत हॉट थीं
सीमा ने काले रंग के कपड़े पहने हुए थे जिसमे उसके बूब्स चमक रहे थें उसका फिगर 36, 28, 38 बहुत मस्त थीं, पूरी भीगी हुई थी जिससे उसके कपडे शरीर से चिपके हुए थे, बिलकुल साफ देख सकते थे की उसकी नाभी कितनी गहरी है, गांड की गोलाई कहा तक है सब दिखाई दे रहा था
मैं ये सभी देख रहा था तभी रोहन ने पूछा भाई क्या देख रहा है ? मैं बोला मछलियां, वो बोला अच्छा मुझे लगा जलपरिया और दोनो हंसने लगे फिर हम घर चले गए, अगले दिन शादी की कोई रसम थी शायद गांव की बहुत सारी औरतें और हमारे फेमिली की औरते सभी कुएं के पास जा कर पूजा करने लगी,
मै सब देख रहा था क्योंकि ताऊ जी के घर के पास ही कुंआ था,देखा तो भीड़ में सीमा भी आई हुई थीं इस बार उसने साड़ी पहनी हुई थीं नीले रंग की खुले बाल क्या मस्त लग रही थीं,
थोड़ी देर बाद सभी औरतें घर के बाहर बैठ कर कोई शादी का गाना गाने लगी मुझे तो कुछ समझ नही आ रहा था मैं तो बस सीमा को देख रहा था, मैं दरवाजे के पास खाट पर लेट कर सब देख रहा था,
तभी थोड़ी देर में सीमा अंदर आई शायद ताई जी ने कुछ सामान मंगवाया था, अंदर जाते हुए सीमा मुझे देख कर बोली आप वही हो जो शहर से आए हो रोहन भईया के भाई, मैं हैरानी से उसे देखने लगा फिर मैंने पूछा तुम्हे कैसे पता तो बोली रोहन भईया ने बताया था, फिर मैंने बोला हां सही कहा मैं वही हूं,
बात करते समय वो मुझे अजीब नज़र से देख रही थी , फिर वो समान लेने अंदर चली गई, थोड़ी देर बाद बाहर आई और ताई जी को कुछ बता रही थी मैं डर गया , इतने में वो मेरे पास कर बोली हल्दी की गांठ हंडी में रखी हुई है चाची ने लाने को बोला है मगर बहुत ऊपर है तो चाची (रोहन की मैं) ने बोला आप उतार दोगे, मदद के लिए बुला रही थी मैं ऐसे ही डर रहा था,
फिर हम अंदर गए, कमरे में बहुत कम रोशनी थी ( गांव के घर जो कि मिट्टी से बने होते थे ), देखा तो हांडी जिसमे हल्दी की गांठ थी वो तो बहुत ऊपर थी मेरा भी हाथ वहा नही जा रहा था, मैं इधर उधर देखने लगा के कोई सामान मिले तो उसके ऊपर चढ़ कर उतारू देखा तो की कुछ भी नही था, इतने में सीमा बोली आप मुझे उठाओ मैं हांडी उतार लूंगी,
मैने कहा ठीक है और सीमा को कमर से उठाया वो बोली थोड़ा ओर ऊपर फिर मैंने उसके दोनो कुल्ल्हो से पकड़ कर उठाया ( बहुत नरम और गोल गोल थी ) उसने हांडी पकड़ ली, इतने में मेरा बैलेंस बिगड़ गया और हम दिनों गिर गए सीमा नीचे मैं उसके ऊपर मेरे हाथ सीमा के बूब्स पर थे,
किसी को चोट नही लगी मगर मैंने मौका देख कर बूब्स को मसलने लगा इतने में सीमा मुस्कुराने लगी, फिर मैंने किस्स करना शुरू किया सीमा भी मेरा साथ देने लगी,
फिर वो जल्दी से उठी और बोली यहां नही मैं रात को आती हूं ये बोलकर बाहर चली गई..
Note: कहानी सत्या घटना है केवल स्थान और नाम बदले हुए हैं…indiasex stories
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