हेलो दोस्तों मैं संगीता फिर से आप सब के सामने हाजिर हूं, अपनी आगे की कहानी लेकर, जिन्होंने मेरी पिछली कहानी नही पढ़ी है कृपया जरुर पढ़ ले ताकी आप को कहानी समझ आ जाए और मज़ा दुगना हो जाए,
अब ज्यादा समय खराब न करते हुऐ कहानी पर आते हैं, सुबह का नज़ारा देख कर मेरे मन में अब हवस जाग चुकी थी, मैं अब अपने भाई से चुदना चाहती थी,भाई ने रात को बहुत पी रखी थी,
मेरे बूब्स को मसलते हुए भाई सीढ़ियों पर बैठ गया, मैंने भी भाई को अपनी बाहों में भर लिया और भाई को चूमने लगी,भाई के मुंह से शराब की महक आ रही थी लेकिन मुझे वो भी अच्छी लगने लगी थी,रात का समय होने के कारण मुझे पता था अब मेरे परिवार से कोई भी उठने वाला नही है,
चूमते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था अब तक भाई सीढ़ियों पर लेट चुका था, मैने कपड़े उतार दिया और अब ब्रा में भाई सामने थी,मैने भाई का मुंह अपने दोनो बूब्स पर रख कर दबाने लगी, तभी भाई ने भी मेरे बूब्स को चूसने लगा,
भाई नशे में जरुर था लेकिन उसे सब पता था के वो क्या कर रहा है और किस के साथ कर रहा है, जैसे ही मेरे बूब्स चूसने लगा मेरे बदन में बिजली सी दौड़ गईं,भाई मेरे निप्पल को अपनी जुबान से चाटने लगा और मेरा दूध ऐसे भी रहा था जैसे दूध पी रहा हो,
अब तक भाई कुछ होश आ चुकी थी मुझे इशारे में बोल रहा था के मुझे ऊपर ले चलो, मैंने कंधे पर फिर से भाई को संभाला और अपने कमरे में ले गई, अंदर जाते हो मैने अपने सारे कपडे उतार दिए, मैंने भाई के भी कपड़े उतार दिए और अब भाई सिर्फ अंडरवीयर में था,
मैने भाई को पूरा नंगा कर दिया और भाई का लंड जो सात इंच का था वो पूरा खड़ा था, मैंने बिना देरी के घुटने पर बैठ कर भाई के लंड को मुंह से सहलाने लगीं, मुंह में डालते ही लंड ओर ज्यादा सख्त हो गया, लंड के मुहाने पर अपनी जुबान को घुमाने लगी,
तभी भाई का मेरे सिर पर था वो मेरे बालों को पकड़ कर मेरे मुंह चोदने लगा,भाई अपने चरम सुख पर था,मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था, क्योंकि मैं अपने हाथो से अपनी चूत को भी मसल रही थी,
भाई की दोनो अंडो को मुंह में बार बार डाल रही थी, फिर ने भाई को लिटा दिया और दोनो टांगो को फैला कर ऊपर चढ़ गईं, लंड को चूत के द्वार पर रख कर बैठ गई, एक झटके में लंड मेरी चूत में दाखिल हो गया, इतना मोटा सख़्त लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गईं,
दर्द बहुत हो रहा था लेकिन जब मैंने अंदर बाहर किया तो मज़ा आने लगा,अब मैं खुद ही अपनी कमर को ऊपर नीचे कर के भाई से चुदाई कारा रही थी, मैं बार बार अपने बूब्स को दबा रही थी, फिर मैंने भाई को थोड़ा आगे किया और अपनी चूत भाई के मुंह के सामने रख दी,
अपनी चूत को भाई के मुंह पर मसलने लगी, भाई ने मेरी चूत के दाने को निप्पल समझ कर चूसने लगा, मैं बता नही सकती वो एहसास कैसा था, आज भी अगर उस पल को याद करती हो तो गीली हो जाती हूं,भाई अपने दांतो से मेरे दाने को कर रहा था,
हल्का सा दर्द बहुत सारा मजा आ रहा था, दोनो की जिस्म की आग की वजह से कमरे में गर्मी बढ़ गई थी, अब थोड़ा तेज़ी से मसलने लगी, अब तक भाई को भी एहसास हो गया था ये बूब्स नही चूत है,
लेकिन भाई कोई फरक नही पड़ा वो उसी जोश से चाटने में लगा रहा,फिर कुछ देर बाद मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया, मैं भी थक कर भी के ऊपर लेट गई और सो गई, कुछ घंटों बाद भाई उठ गया, हम दोनो की ऐसी हालत देख कर उसने मुझे फिर होश में चोदा,
वैसे भी भाई मुझे सुबह से ही चोदने वाला था फिर अब हर दिन हमारे बीच चुदाई होने लगी,अब भाई का हर रोज यही काम हो गया था, आगे कैसे भाई ने मुझे अपने दोस्त के साथ सोने के लिए मनाया वो कहानी अगले भाग में…
Note: कहानी सत्या घटना है केवल नाम ओर स्थान बदले हुए हैं…desi adult stories
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