नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अमर है और मैं यूपी का रहने वाला हूँ। मैं इस का नियमित पाठक हूँ और आज मैं अपने जीवन की सच्ची घटना पेश करने जा रहा हूँ। तो बात उस समय की है जब मैं 19 साल का था। मेरी माँ बेहद सुंदर है वो 37 साल की ही, और रंग गोरा है। उनके माँ इतने बड़े हैं कि कोई भी देखे तो लार टपका दे,







मेरे पापा एक बिज़नेसमैन हैं और अधिकतर काम के चक्कर में शहर से बाहर ही रहते हैं,उनके पीछे दुकान का काम नौकर ही संभालते हैं पापा नौकरों पर बहुत विश्वास करते हैं,मेरी माँ का नाम रेणु है बेहद खूबसूरत,गोल मटोल चूचियां, गांड फूली हुई हैं मतलब बस एक परी कभी कभी तो मैं भी माँ के साथ,






सेक्स करने को सोचता और यही सोच कर मुठ मार देता,तो बात उस समय की है जब मैं कॉलेज में था और मेरी दोस्ती शहर के कुछ लफंगों से हो गई वो रोज़ लड़कियों को छेड़ते थे, कभी उनका कुर्ता फाड़ देते थे तो कभी सलवार मैं उनके साथ होता था और मुझे भी ये करने में बड़ा मज़ा आने लगा,धीरे-धीरे उनकी संगत में मैं काफी बिगड़ गया और मां से भी सही से बात नहीं करता था,







एक दिन वो मुझे अपने साथ शराब पीने ले गए,वो मेरा पहली बार था,इसलिए एक्साइटमेंट ज़्यादा थी,मेरे ग्रुप में पंकज, शशि और राजीव जैसे कुछ शहर के नामी गिरामी गुंडे थे जो अक्सर जेल जाते रहते थे,उस दिन मैंने काफी शराब पी ली और मैं बिल्कुल होश में नही रहा तब राजीव पंकज से बोला “यार तूने कभी अमर की मां को देखा है ”पंकज ने कहा,







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हां वही बहन की लोड़ी साली रंडी जो मेरे बाप से कभी चुदवाती थी साली कुतिया के बूब्स देखे मेरे बाप ने ही दबा दबा कर इतने बड़े किए हैं,मैं उनकी बातें सुन रहा था और यह सुनकर मुझे काफी मज़ा आ रहा था,तब शशि बोला “यार मुझे भी दर्शन कराओ उस रांड के मैं भी तो देखूँ साली बहनचोद कैसी दिखती है”तभी मैंने नशे में बोला “यार तूने कभी मेरी मां को नहीं देखा,







अबे मादरचोद अगर एक बार देख लेगा तो मर जाएगा साले इतनी खूबसूरत है कि देखते ही तेरी पेंट गीली हो जाएगी,उन हरामखोरों को और क्या चाहिए था उनके मन की मुराद ही पूरी होने जा रही थी,वो मेरे साथ मेरे घर आ गए घर में मेरी मां अकेली थी मैं उस समय नशे में था,मां ने दरवाजा खोला और मुझे शराब पिए हुए चोक गई पर मुझे उन्होंने कुछ ना कहा और मुझे मेरे कमरे में सुला दिया,







सुबह जब मेरी आँख खुली तो मुझे कल रात की याद आई और मैं सीधा मम्मी के पास पहुँच गया और कल रात का ज़िक्र छेड़ा माँ बोली कल रात तुमने ज़्यादा पी ली थी,पर मुझे तुमसे ये उम्मीद न थी कि तुम शराब पियोगे मैंने कहा मुझे भी उम्मीद न थी कि आप पंकज के बाप के साथ यह सुनकर वो थोड़ा सकपकाई और वहां से चली गई,उस दिन ना मुझ से बोली और ना मैं उसे,







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शाम को पंकज मेरे घर आया,उसे मेरी माँ ने बुलाया था,वो दोनों किचन में खड़े बातें कर रहे थे और मैं उनकी बातें सुनने की कोशिश करने लगा पर सुन ना सका थोड़ी देर बाद पंकज वह से चला गया,इस बार मेरे सब्र का बांध टूट गया और मैं माँ के पास जा पहुंचा माँ ने बताया कि पंकज के पापा के साथ मैं चुदा करती थी और अगर तुम यह बात अपने पापा को बताना चाहते हो,







तो बता देना,यह कह कर वो वहां से चली गई और मेरा लौड़ा तन  गया। मुझे यह सोचकर मजा आ रहा था कि मेरी मां किसी और से चुदा करती थी,मेरी मां, मेरी प्यारी रंडी, कुतिया,बहन की लोड़ी किसी और से अब मैंने भी तय किया कि अगर वह किसी और से चुद सकती है तो मुझसे क्यों नहीं इधर पंकज भी उसे चोदने का प्लान बना रहे थे मैं भी उनके साथ शामिल हो गया,







हमने तय किया कि कल मेरी मां का बर्थडे है और हम पार्टी फार्म हाउस में बनाएंगे,मैंने ये बात जाकर मां को सुनाई तो वो भी राजी हो गई। हम रात को फार्म हाउस पहुंच गए,फार्म पर केवल एक बुद्धा वॉचमैन थे हम चारो दोस्त और मेरी मां अंदर चले गए पंकज ने मेरी मां के गांड पे हाथ रख रखा था और धीरे-धीरे उसको सहला रहा था,







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मां ने केक काटा और मेरे सभी दोस्तों ने केक लेकर मेरी मां के पूरे बदन पर लगा दिए शशि तो मां के बूब्स पर केक लगाने लगा अब मां पूरे केक में सरबोर थी इधर वॉचमेन भी मां को निहार रहा था। ये सब करने के बाद राजीव ने मेरी मां को गोद में उठा लिया और स्विमिंग पूल में फेंक दिया मेरी मां गुलाबी साड़ी में थी और पूरी भीग गई,







उनके कपड़े ट्रांसपेरेंट हो गए थे और उनके बूब्स साफ नजर आ रहे थे,उनके निप्पल काफी ज्यादा बड़े थे,यह सब देखकर वॉचमेन हमारी तरफ आया और हमें डांटने लगे हुए बोला कि तुम्हें शर्म नहीं आती कि तुम मालकिन को इस तरह स्विमिंग पूल में फेंक दिया यह कहते हुए बुढ़ा स्विमिंग पूल में कूद पड़े और मां को बाहर निकाल लाया,







बूढ़ा साला हरामखोर वो भी मेरी मां के निप्पल देखने लगा और मेरी रंडी मां भी उसको छुपा नहीं रही थी,शायद उसका भी चुदवाने का मन कर रहा था,वो बोली काका क्या आपके पास कोई कपड़े होंगे इन बच्चों ने तो मुझे सारा भिगो दिया,अब बूढ़े की बारी थी, वो बोला में सब कपड़े तो नहीं हैं,






हां मगर मेरे पास कुछ फटे हुए कपड़े के लोथड़े हैं अगर आप चाहें तो वो लंगोट पहन सकती हैं मेरी माँ राजी हो गई और बूढ़े के साथ उसके कमरे में चली गई,थोड़ी देर बाद बूढ़े ने माँ की साड़ी,ब्लाउज और पेटीकोट बाहर आ गया और उन्हें सुखाने लगा,उसके बाद वो बूढ़ा फिर नीचे चला गया,हम सब सोच रहे थे ये हो क्या रहा था। तब मम्मी बाहर निकली और मेरी तो चीख़ निकल गई,







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मम्मी, बिकनी में बाहर आ गई थी ये सब देखकर हम हैरान रह गए वो हमारे पास आए और बोली कि बेटा तुम सब इतने बड़े हो गए हो कि,तुमने कहीं लड़कियों और औरतों को इस तरह देखा होगा तो आज अपनी दोस्त की मां को भी देख लो बस फिर क्या था मेरे सारे दोस्त मेरी मां पर पागल कुत्तों की तरह टूट पड़े,








मां के हाथ मेरे कब्ज़े में थे,मां के एक बूब्स पर शशि था तो दूसरे पर पंकज चूत पर राजीव था और गांड पर वॉचमैन उस रात हमने जी भरकर चुदाई की और अपनी ठरकी माँ की प्यास बुझाई आज हमको 3 साल हो गए और अब तो मेरी माँ दुकान के नौकरों से भी चुदवाने लग गई है, इसके लिए मेरे पापा ने हामी भर दी है,







बस शर्त ये है कि वही नौकर मेरी माँ को चोद सकता है जिसकी बीवी मेरे बाप से चुदवाए,अब तो मैं भी अपनी नौकरो की बीवी को चोदता हूँ और बगल के कमरे में मेरी माँ नौकरों के लोडे खा रही होती है,दोस्तों आशा है कि आपको मेरी ये कहानी अच्छी लगी होगी.कहानी को अंत तक पढ़ने वालों का धन्यवाद…




Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…




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