नमस्कार दोस्तो,मेरा नाम राहुल है,मैं पुणे का रहने वाला हूं,आज मैं अपनी माँ की चुदाई स्टोरी आपको बताने जा रहा हूं,काफी दिन हो गए थे मुझे अपने गांव गए हुए,पुणे में रोज मां और पापा फोन करके कहते थे कि कुछ दिन के लिए गांव आजा हमारा भी मन लग जायेगा,दरअसल पुणे में चाचा और चाची देखभाल के मामले में मां-पापा की कमी महसूस ही नहीं होने देते थे,वो मुझे अपने बेटे

की तरह रख रहे थे,फिर भी मां की याद तो आती ही थी,2 साल हो गये थे मैं अपनी मां से नहीं मिला था कुछ दिन का समय निकाल कर मैं मां से मिलने गांव चला गया,मेरी मां का नाम मधुरा है मेरी मां ने काफी दिनों तक मेकअप आर्टिस्ट का काम किया है. उसके बाद वो घर की जिम्मेदारियों में उलझ गई और फिर मेकअप का काम बंद कर दिया,अब वह एक हाउसवाइफ है मगर मेकअप करना उसे बहुत पसंद है,

दोस्तो,मेरा गांव काफी छोटा है,वहां पर न तो घूमने के लिहाज से कोई अच्छी जगह है और न ही कोई मार्केट या मॉल जब मैं गांव पहुंचा तो मैंने मां और पापा को भी नहीं बताया था कि मैं आ रहा हूं,जैसे ही मैं घर पहुंचा तो मां मुझे देख कर चौंक गई मुझे देखते ही उसकी आँखों में पानी भर आया उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया और मेरे बालों को प्यार से सहलाने लगी,उसका गला भर आया और वो मुझे रोते हुए हल्का डांटने लगी वो बोली- इतने दिन

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से तुझे मेरी याद नहीं आई क्या? एक ही तो बेटा है मेरा और वो भी इतनी दूर रहता है मुझ से चल अंदर आ जा हाथ मुंह धो ले मैं तेरे लिए खाना लगा देती हूं,मां जज्बातों में मुझे दुलार रही थी और मेरा ध्यान मेरी मां के जिस्म पर जा रहा था जब मैं गांव से पुणे गया था तो उस समय मां काफी सिम्पल और सादे कपड़ों में रहती थी,मगर आज तो उसका रूप ही बदला हुआ लगा मुझे वो काफी मॉडर्न हो चुकी थी,उसने एक पीले रंग की जालीदार साड़ी पहनी हुई थी

जिसका ब्लाउज काफी डीप गले का था,ब्लाऊज वैसे तो मां ने अपने दूधों को छुपाने के लिए डाला हुआ था लेकिन वो मेरी मां के स्तनों को संभाल नहीं पा रहा था,मैं घर के अंदर चला गया और मैंने बैग एक तरफ रख दिया मैं हाथ मुंह धोने बाथरूम में चला गया फिर फ्रेश होकर कपड़े चेंज किये और खाना खाने किचन में गया,पिछले दो सालों में घर में कई नई चीजें दिखाई दे रही थीं नया फ्रिज,नया एसी, नयी डाइनिंग टेबल मैं तो सोच में पड़ गया था

कि दो साल में ऐसा क्या हो गया कि इतनी सारी नयी चीजें खरीद ली गयीं मैंने मां से पूछा- मां,ये सब नयी चीजें कैसे? पापा की दुकान से तो इतनी आमदनी नहीं है,फिर ये सब कैसे मां?वो बोली- नहीं,दुकान अब काफी बढ़ गयी है मैं भी कई लड़कियों को मेकअप का काम सिखा रही हूं इसलिए घर की आमदनी भी बढ़ गयी है,दोस्तो,जब से मैं घर में दाखिल हुआ था तब से मैं मां को ही घूर रहा था,आज वो बहुत सुंदर लग रही थी मेरी मां का साइज भी 

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३५-३४-३० का हो गया था,जालीदार पीली साड़ी में क्या कमाल लग रही थी वो आज! हम डायनिंग टेबल पर खाना खाने बैठ गए. मां मेरे आगे की तरफ बैठ गई हम खाना खाने लगे,मेरा ध्यान खाने में कम और मां की ओर ज्यादा था,2 साल बाद मिले थे इसलिए बातों का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था,मेरी मां का सेक्सी फिगर मुझे बार बार उनकी ओर देखने पर मजबूर कर रहा था,बढ़ते बढ़ते वासना इतनी बढ़ गयी कि मेरा मन मां के बारे

में सोच कर मुठ मारने का करने लगा,इसके लिए मेरे दिमाग में एक आइडिया आया मैंने मां से कहा कि मैं उसके साथ एक सेल्फी लेना चाहता हूं मां भी तैयार हो गई जब मैं मां के साथ सेल्फी ले रहा था तो मैंने खुद का फ्रेम काट दिया और मां को ज्यादा फ्रेम में लिया,सेल्फी में मां का सेक्सी फिगर और उसके बूब्स की घाटी साफ साफ दिख रही थी,सेल्फी लेकर मैं बाथरूम में चला गया,वहां पर मोबाइल निकाला और मां की फोटो को जूम

करके देखने लगा मैंने उसके बूब्स पर जूम किया और पैंट की चेन खोल कर लंड को बाहर निकाल लिया,मां के स्तनों को देखते हुए मैं लंड की मुठ मारने लगा,मुठ मारते हुए मेरे मुंह से हल्की कामुक आवाजें आने लगीं- आह्ह … मधुरा … आह्ह … आई लव यू  आह्ह … स्सस … आह्ह मेरी उत्तेजना बहुत बढ़ गयी थी और मैं तेजी से लंड पर हाथ चला रहा था,दो-तीन मिनट में ही मेरे लंड से वीर्य छूट पड़ा,कई पिचकारी निकाल कर मेरा लंड धीरे धीरे

शिथिल होता चला गया,बहुत दिनों के बाद वीर्य छोड़कर मजा आ रहा था बहुत अच्छा लग रहा था,फिर मैं बाथरूम से बाहर आ गया,शाम के ७ बज गये थे और मैं काफी थका हुआ महसूस कर रहा था मैं आराम करने के लिए अपने रूम की ओर चला,मैंने मां से कह दिया कि मैं सोने जा रहा हूं जब पापा आ जायेंगे तो मुझे उठा देना,रूम में जाकर मोबाइल चलाते हुए मुझे कब नींद लग

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गयी मुझे पता नहीं चला,जब मेरी नींद खुली तो रात के २ बज रहे थे,मैं पानी पीने के लिए उठा और किचन की तरफ बढ़ा मैंने देखा कि मां के रूम की लाइट अभी भी ऑन थी,मैंने सोचा कि मां और पापा की चुदाई चल रही होगी,मेरा मन भी करने लगा कि मैं मां और पापा को सेक्स करते हुए देखूं.मैंने रूम में झांका तो अंदर केवल मां ही थी,मां कोई किताब पढ़ रही थी और चादर ओढ़ कर बैठी हुई थी,फिर उसको शायद गर्मी महसूस हुई और एकदम से

मां ने वो चादर हटा दी मैं सामने का नजारा देख कर स्तब्ध रह गया,मां ने केवल ब्लाउज ही पहना हुआ था,उसके स्तनों को छोड़ कर बदन का बाकी हिस्सा पूरा नंगा था न साड़ी और न पेटीकोट और न ही पैंटी उसने अपनी टांगों को फैला रखा था जिसमें जांघों के बीच वाले भाग में कुछ बाल दिख रहे थे और उनके पीछे छुपी थी मेरी मां की चूत चूत देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं वहीं पर लंड को सहलाने लगा मैंने मन ही मन ठान लिया था,

कि अब की बार पुणे जाने से पहले मां की चुदाई करके ही जाऊंगा फिर मैंने किचन में जाकर पानी पीया और मेरी उत्तेजना थोड़ी शांत हुई उसके बाद मैं अपने रूम में जाकर सो गया,अगली सुबह मां ने मुझे उठाया,उसने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो काफी सुंदर लग रही थी,उठने के बाद मैंने नाश्ता किया और फिर मां के साथ गप्पें मारने लगा,मैंने पूछा- रात को पापा नहीं आये क्या?
वो बोली- रात में देर से आये थे और फिर बाहर टीवी देखते

देखते ही सो गये,आज शायद जल्दी आ जायेंगे तुम्हारे लिये,मैं खुश हो गया,फिर ऐसे ही बातों ही बातों में दिन ढल गया और रात हो गई,आज भी पापा जल्दी नहीं आए,इसलिए मैं और मां खाना खाकर अपने अपने रूम में सोने चले गए,रात को ११:३० बजे मेरी नींद खुल गई,मैं बाहर आ गया,बाहर हॉल में देखा तो पापा सो गए थे और मां के रूम की लाइट भी ऑफ थी,शायद आज मां जल्दी सो गई थी मैं धीरे से मां के रूम की तरफ बढ़ा मैंने धीरे से रूम का

दरवाजा खोला मां दूसरी तरफ मुंह करके सो रही थी मैं धीरे से अंदर चला गया और रूम का दरवाजा लगा दिया,फिर आहिस्ता से मां के बेड पर लेट गया और सो गया,लेटे हुए पांच मिनट ही हुए थे कि लाइट चली गयी,इतने में ही मां ने करवट बदल ली और मेरे बदन पर हाथ रख दिया,मां ने नींद के नशे में बड़बड़ाया-आप कल बाहर ही सो गये आज भी आपने आने में इतनी देर कर दी राहुल भी घर में है और आप बाहर सो जाते हैं,उसके रहते बाहर

चुदाई कैसे कर सकते हैं? थोड़ा जल्दी आ जाया करो ना जान!ऐसा बोलते हुए मां ने मेरी पैंट का बटन खोलना शुरू कर दिया. मेरे सीने में धक धक हो रही थी,मैं बुरी तरह से फंस गया था,फिर भी मैं चुपचाप शांति से लेटा रहा,मां मेरी पैंट उतारने लगी और मैंने गांड उठा कर उनको जगह दे दी पैंट खींचने के लिए पैंट नीचे करके मां ने मेरी अंडरवियर में हाथ दे दिया और मेरे लंड को पकड़ लिया डर के मारे मेरा लंड खड़ा भी नहीं हो रहा था,आगे की कहानी अगले भाग में…

Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं..

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