नमस्कार दोस्तों,मैं आकाश फिर से हाज़िर हूं अपनी आगे की कहानी लेकर मैं UP के एक मशहूर शहर वाराणसी का रहने वाला हूँ,जैसे कि आप सभी जानते है मैं ऐसे परिवार ने रहता हु जहां सब खुले विचारों वाले हैं, कहानी को समझने के लिए भाग –1 जरूर पढ़े अब आगे की कहानी
मुझे पता था ये एकदम गरम हो गई है, तभी माँ पेशाब करने गई और खुद भी अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई, मीनू (छोटी दीदी) चल तू इधर आ मैं तुझे तेल लगाती हूँ और मेरे बगल में ही मीनू दीदी को लिटा दिया,माँ मेरे चेहरे की तरफ बैठी थी और दीदी का पैर अपनी तरफ करके फैला दिया जिससे उनकी बुर खुल गई क्योंकि वो मम्मी की तरफ अपने पैर कर के लेती थी तो मुझे
और बड़ी दीदी को उनकी खुली बुर दिख रही थी,दीदी मेरे लंड को मसलते हुए ऊपर नीचे करने लगी मैं भी अपना हाथ उनकी बुर पे सहलाने लगा ये देख कर माँ ने दीदी से पूछा अब इसका लंड मर्द लगता है ना,देख इसका सुपाड़ा कितना बड़ा और चिकना है,पूरे लंड पे सुपाड़े से लेकर नीचे जड़ तक मालिश कर जितनी मालिश करेगी उतना ही मजबूत होगा और मर्दानगी आएगी,इतना कह कर माँ ने मीनू दीदी के चूत पर भी तेल लगाना शुरू कर दिया,
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मीनू दीदी की बुर की पुट्टियाँ अभी बाहर नहीं निकली थीं,लेकिन बड़ी दीदी की पुट्टी माँ जितनी तो नहीं लेकिन काफी बड़ी थी ये देख कर मैंने माँ से पूछा कि ऐसा क्यों है,तो माँ ने कहा कि उनकी बुर तो तेरे पापा का लंड खाकर और पुट्टियों की चुदाई करने से बड़ी हो गई है और शालू (बड़ी दीदी) की पुट्टी अभी फेल रही है,जितना तू उसे खींचेगा उतना ही वो और लंबी होगी,इतना कह कर माँ मेरी तरफ घूम गई,अब मेरी एक तरफ माँ की खुली बुर थी,
और दूसरी तरफ शालू दीदी की बुर तभी माँ ने दीदी से कहा कि उसकी बुर में तो खुजली होने लगी है और खुद लेट कर मेरी दीदी से अपनी बुर में उंगली करने को कहा,माँ की चूत वाकई में बहुत बड़ी थी उसके दोनों होठों को खोलने के बाद उनकी पुट्टियाँ बाहर निकल कर 3-4” लटक गई,तभी बड़ी दीदी ने माँ से कहा कि माँ जब बगल में 7” का मस्त कटा हुआ लंड हो तो उंगली क्यों करवाती हो ये लंड भी तो तुम्हारी बुर से ही बाहर आया है,
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फिर से अंदर बाहर हो जाएगा,ये सुन कर माँ और सब लोग हस पड़े,माँ ने कहा लगता है मेरे बेटे का मर्दों वाला लंड देखकर तेरी बुर भी उसे खाने के लिए ललचा रही,चल ठीक है तब ही खा लेना,इतना कह कर माँ ने मुझसे पूछा कि “क्यों बेटा क्या तो अपनी माँ की बुर की खुजली शांत करेगा” तो तुरन्त कहा क्यों नहीं माँ आखिर तुमने तो मेरे लंड को मर्द का लंड बनाया है,
और वैसे भी चमड़ा काटने से पहले तुमने कहा था कि अभी मुठ मारने में परेशानी होगी काटने के बाद तुम मुझे तोहफा दूँगी, हाँ मेरे बेटे यही है तेरा तोहफा है। इतना कह कर मम्मी ने बड़ी दीदी से उनकी बुर पर तेल लगान के लिए कहाँ और मुझे लेटे ही रहने को कहा और जब दीदी ने उनकी पुट्टियों पर तेल लगा दिया तो वो उन्हें फैलाती हुई मेरे लंड पर धीरे से बैठ गई और अपनी कमर को ऊपर नीचे करने लगी,
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मेरे लिए तो ये जन्नत का मज़ा था बड़ी दीदी माँ की बुर मेरे लंड को डालने में लगी थी तो छोटी दीदी अपनी बुर को फैला कर माँ को चाट रही थी,माँ तो मेरी मस्ती के तुरन्त झड़ गई,मेरे भी लंड से मस्ती का पानी निकलने लगा पूरे पुहरे के साथ जो माँ की गांड और बुर के साथ-साथ दीदी के हाथों को भीग गया,ये मेरे वीर्य का पहला फुहारा था जो काफी गाढ़ा था,उसके बाद दोनों दीदी को भी चोदा,
उस दिन के बाद ये हम लोगों के घर में आम हो गया,जिसे जब भी मौका मिलता वो मज़ा करता, माँ तो जब भी नहाने जाती मुझे ज़रूर साथ ले जाती और उसे मेरे सुपाड़े पर साबुन लगाने में मज़ा आता था फिर वो मेरे लंड को मुँह में भर चूसती और मैं उसके मुँह में डाले डाले ही झड़ जाता था जो वो पूरी तरह गीली हो जाती थी, कुछ दिनों में हम लोगों ने घर पर दो मंजिलें और बनवा लिया,
और उसमें सिर्फ अंग्रेजी लड़कियों को जो घूमने या पढ़ने के आती थी,उन्हें पेइंग गेस्ट रखते थे,उनमें से कई सारी खुल गई थीं, खुले नेचर की वो पहले से होती है,हम लोगों के खुलने के कारण और खुले रहती थीं,कई बार तो बिना चड्डी के सिर्फ स्कर्ट पहनकर छत की सीढ़ी पर बैठकर चाय पीती थीं,जिससे उनकी बुर पूरी दिखाई पड़ती थी,कई तो मेरी मां और दीदी से लेस्बियन संबंध भी बना चुकी थीं,
गर्मी के दिनों में हम लोग रात को छत पर ही सोते थे और चाट चारों तरफ से बंद होने के करण कुछ नहीं दिखाता था तो सब लोग नंगे ही सोया करते थे उनको से काई को तो मैं माँ के साथ रात में ही छत पर चोद चुका था,अब मैं इन अंग्रेजी लड़कियों के बीच मर्द के नाम से फेमस हो गया हूँ.कहानी को अंत तक पढ़ने वालों का धन्यवाद…
Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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