नमस्कार दोस्तों,मेरा नाम आकाश है मैं UP के एक मशहूर शहर वाराणसी का रहने वाला हूँ,मैं २२ साल का हैंडसम आदमी हूँ, एक ट्रैवल एजेंसी का मालिक हूँ,मेरे घर में मेरी माँ ४४ साल की हैं लेकिन देखने में ३५ की लगती है पापा और दो बड़ी बहनें हैं, बड़ी बहन २५ की शादी हो गई है और छोटी दीदी २२ साल की अभी तक नहीं हुई है मेरी माँ और मेरी बहने बहुत सुंदर हैं,
और हम लोग आपस में बहुत खुले भी हैं,पापा भी इसी नेचर के हैं, हालांकि वो सुबह ही दुकान चले जाते हैं, और रात में देर से आते हैं आज मैं आप लोगों को मेरे घर की सच्ची कहानी बताना चाहता हूँ, जो मेरे बचपन से शुरू हुई और जब हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन गई है हमारा मकान गंगाजी के पास है और टूरिस्ट ज़्यादा आने के कारण हम लोगों ने अपने मकान का सेकंड और थर्ड फ्लोर PG हॉस्टल में कन्वर्ट कर दिया है,
सिर्फ़ विदेशी लड़कियों के लिए,उनमें से कुछ तो BHU में पढ़ती है और हमारे परिवार का हिस्सा बन गई है क्योंकि हम लोग काफी ओपन माइंडेड हैं इसलिए वो लोग भी अपनी नेचुरल लाइफ़स्टाइल में रहती हैं,बनारस में वैसे भी हर परिवार में काफी खुलापन होता है क्योंकि लोग अक्सर गंगाजल पीते हैं और वही पब्लिक के सामने कपड़े बदल लेते हैं,
आप सभी मेरी कहानी Fantasystories.in पर पढ़ रहे हैं, यहां पर आप को रिश्तों में चुदाई, दोस्त की हॉट मॉम की चुदाई,मेरी हॉट चाची,लेस्बियन सेक्स स्टोरी,देसी गांव की सेक्स स्टोरी,थ्रीसम सेक्स स्टोरी,ससुर बहू का गुप्त रिश्ता,दीदी की चुदाई जंगल में देवरानी जेठानी का प्यार पढ़ सकते है,
घर पर आदमी और जवान लड़के के लाल रंग का अंगोछा लपेट लेते हैं जिसमें से भी सब कुछ दिख जाता है, खैर ये सारी बातें मैं आगे बताऊंगा पहले मैं कहानी की तरफ आता हूँ,अपने माँ बाप की एकलौता बेटा होने के कारण काफी प्यार दुलार में पला बढ़ा, कोई भी मुझे डांटता भी नहीं था माँ मेरा बहुत ध्यान रखती थी,वो मुझे हमेशा खुद ही नहलाती थी,बहुत व्यस्त होने पर ही बड़ी दीदी नहलाती थी,माँ जब भी नहाती थी तो मुझे आवाज़ दे बुला लेती थी,
माँ हमेशा अपने कपड़े उतार कर नहाती थी और मुझे भी नंगा कर देती थी,जब वो मुझे नहलाती तो उसकी चूचियां हिलती रहती थी, वो साथ ही खुद भी नहाती थी और साबुन लगाती थी,मेरे सामने ही अपनी टैंगो को फैलाकर अपनी चूत पर साबुन लगाती और साफ करती थी,जब वो मुझे साबुन लगाती तो मेरे छोटे से लंड पर भी रगड़ती और चमड़ा पीछे करके सुपाड़े को साफ करती फिर पानी से धो देती,अक्सर जब वो मेरे लंड का चमड़ा खोलती तो,
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मेरा लंड खड़ा हो जाता था ये देखकर वो मुस्कुरा देती, फिर मुझे साफ करके अपनी चूत भी फैलाकर साफ करती,उस समय तो मैं छोटा था इसलिए नहीं जान पता था कि कौन सा हिस्सा क्या है पर जब वो एनी बुर को फैलाकर उससे लटकते थे हुए 3 इंच लंबे चमड़े को साफ करती तो मैं मां से पूछता कि मां ये क्या है तब उसी ने मुझे बताया कि बेटा इसे लोग कई नाम से पुकारते हैं पर इसे चूत कहते हैं और अपनी पुट्टियों को बाहर खींच कर रगड़ कर,
साफ करती,मेरी बुआ के यहां भी लोग नंगे ही नहाते थे,मां बताती थी कि उनके यहां तो किसी बाहरी के आने पर ही कपड़े पहनते थे,धीरे-धीरे मैं बड़ा हो गया,जब मैं लगभग २० साल का हो गया तो एक दिन नहलाते समय जब माँ मेरे चमड़ा खोल रही थी तो लंड खड़ा होने के कारण चमड़ा पीछे नहीं हो रहा था जब माँ ने जोर लगाया तो मुझे दर्द होने लगा,मैंने माँ से कहा रहने दो तो माँ ने कहा कि नहीं ये ऐसा क्यों है,
फिर हम लोग नहा के निकल आए, दीदी लोग तैयार होकर स्कूल चली गई लेकिन माँ ने मुझे स्कूल नहीं जाने दिया और दोपहर में आराम से बैठ कर फिर से मेरे लंड को देखने लगी,उस समय मेरा लंड सिकुड़ा था इसलिए चमड़ा खुल गया,फिर माँ ने कहा रुक इसे खड़ा कर फिर खोल तो हूँ फिर वो मेरे लंड को रगड़ने लगी जब मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया तो वो फिर से चमड़ा खोलने लगी और उस वक्त में लंड खड़ा होने ने के मेरा चमड़ा नहीं खुल रहा था,
और दर्द हो रहा था,तब माँ ने कहा की लगता है इसका साइज़ छोटा है तब भी सुपाड़े के ऊपर पूरा नहीं जा राहा है लेकिन इसे ठीक करवाना पड़ेगा वरना जब तेरा लंड पूरा बड़ा हो जाएगा तब सुपाड़ा और मोटा होगा तो परेशानी होगी,फिर उस दिन के बाद से माँ रोज़ मेरे लंड पर तेल लगाने लगी और लंड खड़ा करके चमड़ा खोलती,जब वो व्यस्त रहती तो बड़ी दीदी को बोल देती कि मेरे लंड को खड़ा करके सुपाड़े पर तेल लगा दे और चमड़ा खोल कर देख लिया करे,
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एक दो साल यानी जब मैंने १८ साल के पास पहुंचने लगा तब तक हम सब लोग बहुत खुल गए थे और मेरा लंड भी थोड़ा लम्बा और मोटा हो गया था पर चमड़े का खुलना और कम हो गया था तब माँ ने पापा से पूछा कि क्या इसका चमड़ा कटवा दे तब पापा ने कहा की ठीक है,फिर माँ मुझे ले कर पड़ोस में एक नर्सिंग होम में गई और मेरे लंड की चेकअप करवाया फिर ऑपरेशन करवा दिया,ऑपरेशन करवाने के बाद घर पर मैं नंगा ही रहता था,
और माँ या दोनों दीदी मेरे लंड पर दवा या मालिश करती थी नहाता तो मैं माँ के साथ ही था,माँ भी बड़े ध्यान से मेरे लंड को धोती और पोछती थी,करीब दो महीने में मेरा लंड बिल्कुल ठीक हो गया,एक दिन की बात है रविवार का दिन था हम सब लोग छत पर बैठे थे हमारी छत ऐसी है कि सामने सिर्फ गंगाजी के उस पार का किनारा दिख जाता है और अगल-बगल से कुछ भी दिखाई नहीं देता है तब भी माँ ने कहा आज तुझे तेल लगा देती हूँ,
फिर उसने छोटी दीदी से तेल लेकर आने को कहा और मुझे अपने पास बुलाकर मेरे कपड़े उतारने लगी और मुझे नंगा करके लेटा दिया,पता नहीं क्यों माँ उस दिन काफी अजीब से हरकत कर रही थी,उसने बड़ी दीदी से कहा कि तू भी आज तुझे भी तेल लगा दूँ तो दीदी भी माँ के पास मेरे बगल में आकर बैठ गई, मैं लेटा ही रहा माँ और दीदी के बीच में बात करने लगी माँ का हाथ मेरी,
जांघों पर सरक रहा था,हम सब लोग नीचे चटाई पर बैठे थे तभी छोटी दीदी ने तेल लेकर फिर से और माँ को दे दिया,अचानक माँ ने अपनी साडी उतार दी कहने लगी कि तेल से साड़ी खराब हो जाएगी और अपने पेटीकोट को अपनी जांघों के तक खींच कर सिकोड लिया और मुझे बिल्कुल पास लिटा दिया और टील लगाने लगी,मैं क्योंकि माँ के जांघों के पास लेता था तो पेटीकोट ऊपर होने की वजह से मुझे माँ की चूत दिखने लगी,
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हालांकि माँ की चूत मैं पहले भी कई बार देख चुका था, फिर भी उस दिन पता नहीं क्यों उनकी चिकनी बुर देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा,मेरा लंड पूरा खड़ा होकर टाइट हो गया जो लंबा भाग ६ इंच लंबा और मोटा था,चमड़ा कटा होने से सुपाड़ा पूरा चमक रहा था,ये देख कर माँ ने मेरे लंड को हाथ में लेकर बहुत सारा तेल मेरे लंड पे लगाया और मालिश करने लगी,तभी माँ ने बड़ी दीदी से पूछा कि चमड़ा काटने के बाद मेरा लंड और सुंदर लग रहा है ना,
तो दीदी ने कहा हाँ और पूछा कि क्या वो मालिश कर दे लंड पे तो माँ ने कहा कि क्या उसका मन कर रहा है तो उन्हें कहा की हाँ माँ ने कहा ठीक है तू मालिश कर तब तक मैं पेशाब कर के आती हूँ, लेकिन हां एक काम करो तुम दोनों भी अपने कपड़े उतार दो ताकि कपड़ों पर तेल न लगे और तुम दोनों की भी मालिश करूँगी,इतना कह कर माँ उठी और किनारे बैठ कर पेटिकोट उठा कर पेशाब करने लगी,नीचे लेटने की वजह से मुझे उनकी चौड़ी,
बुर से निकलती पेशाब की मोटी धार दिख रही थी,मेरा पूरा लंड फड़कने लगा,तभी दोनों दीदी ने अपने कपड़े उतार कर मेरे पास बैठ गई, बड़ी दीदी मेरे लंड को पकड़ कर मालिश करने लगी,मेरी दोनों दीदीयों के बुर पर भी कोई बाल नहीं था,उन दोनों की बुर काफी चिकनी थी,फिर मैंने अपना हाथ जानबुझ कर दीदी की बुर पर रख दिया,आगे क्या हुआ अगले भाग में….
Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…
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