नमस्कार दोस्तों मेरा नाम संदीप है, पंजाब मैं से हूँ, यह बात २ साल पुरानी है जब मैं १९ साल का था तो मैं यूरोप में आ गया। यहाँ मेरा एक दोस्त बना रॉकी,रॉकी का जन्म यूरोप में ही हुआ था उनका एक रेस्टोरेंट है, जिसमें उसके पापा खुद खाना बनाते हैं। रॉकी ने मेरी मदद करने के लिए मुझे अपने रेस्टोरेंट में काम पर रख लिया,






कुछ समय बाद मुझे तकरीरें रेस्टोरेंट का सारा काम समझ में आया था,अब रॉकी के पापा कई बार मुझे अकेला छोड़कर अपने प्राइवेट काम कर लेते थे अचानक रॉकी के पापा को प्रॉपर्टी की वजह से इंडिया जाना चाहिए,अब रेस्टोरेंट पर रॉकी मेरी हेल्प करवाता था और कई बार रॉकी स्कूल जाता था तो रॉकी की मम्मी मेरी हेल्प करवाती थी,आंटी बहुत खूबसूरत हैं,







सांवला रंग और सेक्सी फिगर उन्हें देखकर कोई नहीं कह सकता था कि वो एक १८ साल के लड़के की मां हैं, उनकी उम्र ३५ साल है और रॉकी के पापा की उम्र ४८ साल है। कुछ दिन बाद अंकल का फोन आने पर रॉकी भी इंडिया जाने के लिए अब मैं और आंटी अकेले ही रेस्टोरेंट में होते थे,आंटी इंडियन की थी पर रेस्टोरेंट में काम करने की वजह से ज़्यादातर जींस और टी-शर्ट पहनती थी,जब कभी काम कम होता तो आंटी किचन में मेरे साथ








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बातें कर लेती थी,मैंने कभी आंटी को बुरी नज़र से नहीं देखा एक दिन आंटी ने बिल्कुल टाइट टी-शर्ट पहनी और लो वेस्ट जींस जिस में उनके बूब्स बहुत अच्छे लग रहे थे और उनका थोड़ा सा पेट भी दिख रहा था,काम कम होने की वजह से आंटी मेरे साथ बातें कर रही थी पर मेरी नज़र बार-बार उनके बूब्स पर जा रही थी,शायद उनको भी पता चल गया था हमने रात को रेस्टोरेंट बंद की और आंटी जी मुझे ड्रॉप करके अपने घर चली गई,







अगले दिन उन्होंने एक कुर्ता टाइप पहना था जिसमें उनकी क्लीवेज साफ दिखा रही थी,मेरी नज़र फिर उनके बूब्स पर ही रही कुछ गेस्ट को खाना सर्व करने के बाद आंटी जी मेरे पास आईं और बातें करने लगी आंटी काफी खुश लग रही थी,बातें बातों में उन्होंने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछा मैंने शर्मा के बोला की सारा दिन तो रेस्टोरेंट में काम करता हूँ,गर्लफ्रेंड कैसे बनेगी,वो बोली ये बात तो ठीक,चल मैं तेरी हेल्प कर दूँगी,







रेस्टोरेंट में जो आए अगर तुझे पसंद आए तो बता देना मैंने शर्मा के कहा आंटी जी रहने दीजिए,मैं बहुत शर्मीला टाइप हूँ और किसी से खुल के बात भी नहीं कर सकता इसपर वो बोली देख तो सकता है पर बात नहीं कर सकता,आज रेस्टोरेंट में काफी काम था उन्हें खाना लेने के लिए काफी बार किचन में आना पड़ रहा था,तो कई बार मेरा हाथ उनकी गांड को टच हुआ,







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कई बार उनके बूब्स मेरी पीठ को टच कर रहे थे शाम को मैं काफी थक गया तो उन्होंने मुझे व्हिस्की का एक पैग बना दिया क्योंकि मैं थकावट न महसूस करूं और तेजी से काम करूं क्योंकि अभी ३ घंटे और काम करना था,आम तौर पर हम ३ लोग काम करते थे पर अंकल और रॉकी के न होने से सिर्फ २ ही थे १ घंटे बाद आंटी ने मुझे एक और पैग दिया मैंने वो भी झट से पी के काम और तेज कर दिया,आंटी जी देख रही थीं







और मेरे पास आकर बोली कि तुम तो बहुत तेज काम करते हो। हाँ जवान हो अभी तुम्हारी उम्र है तुम कौन सा अपने अंकल की तरह बूढ़े हो गए हो और हस के चली गई अब मेरे को हर आधे घंटे में इक पैग आने लगा और अब तो व्हिस्की ज्यादा पानी कम काम के खत्म होते होते व्हिस्की ने अपना करतब दिखा दिया,अब मैं कपड़े बदल के ऊपर आया तो आंटी रेस्टोरेंट बंद करके बोली कि आज तू हमारे घर चल इंडियन खाना खिलाती हूँ,







उनका घर मेरे अपार्टमेंट के पास ही था मेरा सर घूम रहा था और भूख भी लगी हुई थी तो मैंने हाँ में सिर हिला दिया और आंटी मेरी तरफ देख के हस पड़ी घर जाकर आंटी फ्रेश होने चली गई जब वो बाहर आई तो क्या गजब लग रही थी उन्होंने एक सेक्सी सा पारदर्शी सूट पहना था जिसमें से उनकी ब्रा दिख रही थी,आंटी मेरे पास आई और हाथ में तौलिया दिया और बोली कि फ्रेश हो जा। मैं भी फ्रेश होने बाथरूम गया तो बाथरूम में बहुत अच्छी महक आ रही थी







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और शावर में आंटी की ब्रा और पैंटी टंगी हुई थी उसे देखते ही मेरी नज़र के सामने आंटी की गोल गोल बूब्स घूमने लगे तो मैंने ब्रा और पैंटी को उठा के सुंघा तो बड़ी अच्छी स्मेल आई पर मैंने डर के फिर वही रख दी आंटी टेबल पर खाना लगा रही थी,खाना लगाते वक़्त थोड़ा झुक रही थी तो मुझे उनके बूब्स पूरे दिखाई देते थे और मेरा लंड खड़ा हो गया आंटी ने मुझे एक और पेग बना के दिया पेग काफी स्ट्रॉन्ग था और मैं पहले भी काफी पी चुका था,






मैंने मुश्किल से पेग खत्म किया और मैंने आंटी से खाना खाने के लिए बोला फिर हम खाना खाने लग गए मेरी नज़र आंटी के बूब्स पर बार बार जा रही थी,खाना खाते खाते १२ बज चुके थे,जब मैं जाने के लिए उठा तो शराब की वजह से थोड़ा हिल सा गया तभी आंटी मेरे पास आके मेरे हाथ को पकड़कर मुझे सहारा दिया उस वक़्त मेरे हाथ आंटी के बूब्स पर था,आंटी बोली संदीप यही सो जा तेरे से चला नहीं जाएगा,







इस पहले मैं कुछ कहता आंटी बोली कि अगर तुझे चोट लग गई तो रेस्टोरेंट का ध्यान कौन रखेगा और आंटी मुझे अपने बेडरूम में ले गई और मुझे एक बरमूडा और टी शर्ट ला दी जो कि रॉकी की थी शराबी होने की वजह से मेरे से वो पहनी नहीं जा रही थी तो आंटी मेरी मदद करवाने लगी पेंट उतारते वक़्त आंटी ने मेरे लंड को टच किया और वो खड़ा हो गया अभी मैं अंडरवियर में ही था।  खड़ा होते ही आंटी ने उसे पकड़कर लिया और बोली वाह …







इतना बड़ा,मेरा लंड कुछ 7 इंच का है,इतना बड़ा लंड तो मैंने कभी नहीं देखा,फिर आंटी ने मेरे लंड को अंडरवियर से बाहर निकाल लिया,मुझे बिस्तर पर बिठा दिया और मेरे लंड से खेलने लगी और मुझे भूखी नज़रों से देखने लगी और मुझे किस करने लगी,उन्हें अच्छी तरह से पता था कि कौन सी किस कैसे करनी है शायद उन्हें काफी अनुभव था,आंटी ने मेरा एक हाथ पकड़कर अपने बूब्स पर रखा और मुझे फ्रेंच किस करती रही,








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आंटी का बूब बहुत हार्ड था जैसे काफी टाइम से किसे छुआ ना हो  और आंटी मुझे पूरे शरीर पर किस करने लगे चेस्ट सी होते होते उन्होंने मेरे लंड को मुंह में डाल लिया काफी टाइम यूज़ लॉलीपॉप की तरह चूसने के बाद उन्होंने मुझे अपने बूब्स को चूसने को कहा मैंने भी उनके बूब्स का पूरा रस लिया और फिर उन्होंने मुझे अपनी चूत की किस करने को कहा मैंने जैसे ही किस किया तो वो गीली थी मुझे उनके पानी का टेस्ट काफी अच्छा लगा







इससे पहले मैं कुछ कहता उन्होंने मेरा सर पकड़कर चूत से चिपका दिया और किस में कहने लगी कुछ १५ मिनट तक मैं उनकी चूत को चाट रहा था तभी उनका पानी निकल गया जो सारा मेरे मुंह पर लग चुका था,तब भी उन्होंने मेरे मुँह पकड़ के चाटने लगी,आंटी की प्यास अभी नहीं बुझी थी वो मुझे किस करती रही फिर मेरे लंड को देखकर मुस्कुराई और बोली आओ मेरे बच्चे अब दिखाओ अपना कमाल,और वो अपनी टांगे फैला







कर लेट गई और मैंने लंड अंदर डाल दिया कुछ ७–८ मिनट चुदाई के बाद मैं अपनी मंज़िल पर पहुँच गया आंटी ने लंड बाहर निकाला और मेरा सारा पानी चाट गई,हमने सारी रात बिना कपड़ों के सोए और रात 3 बार आंटी की प्यास बुझाई अगले दिन मैं उनकी आँखों में आँखें नहीं डाल रहा था, तभी आंटी ने मुझे बुलाया और कहा जो हुआ अच्छा हुआ बस हम दोनों ही राज़ को अपने पास रखेंगे वरना तुम्हारी जॉब भी जाएगी और मैं भी। अब हमें जब भी मौका मिले हम एक दूसरे के पति पत्नी बन जाते हैं,कहानी को अंत तक पढ़ने वालों का धन्यवाद..




Note ये कहानी सत्या घटना है केवल नाम और स्थान बदले हुए हैं…





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